तलाक के ज्यादातर मामलों में आपने सुना होगा कि पति को बच्चों के पालन-पोषण के लिए पत्नी को खर्चा देना पड़ता है. लेकिन यहां मामला ठीक उल्टा है. पति-पत्नी के बीच एक विवाद में रोहतक कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. इस फैसले के तहत पत्नी अपनी ही बेटी के पालन-पोषण के लिए हर माह पति को ढाई हजार रुपए खर्चा देगी.
इस मामले में पति डीटीसी का बर्खास्त ड्राइवर है जबकि पत्नी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात है. दोनों के बीच लंबे समय से कोर्ट में तलाक और उत्पीड़न का केस चल रहा है. बच्ची अपने पिता के साथ रहती है.
रोहतक के नौनंद गांव के करतार सिंह की शादी 18 फरवरी 2007 को पानीपत के लाखू बुआना की मुकेश कुमारी के साथ हुई. 20 दिसम्बर 2007 को उनकी बेटी खुशी का जन्म हुआ. साल 2008 में करतार सिंह की डीटीसी में ड्राइवर के पद पर नौकरी लग गई, जबकि वर्ष 2009 में मुकेश कुमारी दिल्ली पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुई और वह ट्रेनिंग के लिए दिल्ली चली गई.
इसके बाद करतार सिंह और मुकेश कुमारी के बीच विवाद रहने लग गया और 18 सितम्बर 2010 को मुकेश कुमारी ने पानीपत के इसराना थाने में करतार सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और मारपीट का केस दर्ज करवा दिया. मुकेश कुमारी अपने ससुराल नहीं लौटी और बच्ची पिता के साथ ही रहने लगी. इस दौरान मुकेश कुमारी ने कभी भी बच्ची को अपने साथ ले जाने की कोशिश नहीं की. केस के चलते करतार सिंह को पहले नौकरी से सस्पेंड और फिर टर्निमेट कर दिया गया. मुकेश ने पानीपत कोर्ट में ही तलाक का केस भी कर दिया.
वहीं, दूसरी ओर करतार सिंह ने रोहतक कोर्ट में अपना घर बसाने के लिए याचिका दायर की और बेटी के पालन-पोषण के लिए खर्चे की भी मांग की. करतार सिंह की ओर से रोहतक कोर्ट में तर्क दिया गया कि मुकेश कुमारी का मासिक वेतन 35 हजार रूपए प्रति माह है, जबकि उसकी नौकरी छूट चुकी है. ऐसे में वह अपनी बेटी के पालन-पोषण में सक्षम नहीं है और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी पिता के साथ मां की भी है. इसलिए बच्ची को पालने के लिए हर माह खर्चा दिलवाया जाए.
उधर, मुकेश कुमारी के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि करतार के पास ना केवल जमीन-जायदाद है, बल्कि डेयरी भी चला रहा है. साथ ही डीटीसी में नौकरी भी करता रहा है. लेकिन कोर्ट ने मुकेश कुमारी के वकील के तर्क को नहीं माना और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद मुकेश कुमारी को ढाई हजार रुपए प्रति माह के हिसाब से बेटी के पालन-पोषण का खर्च पति को देने के आदेश दिए.
करतार सिंह का कहना है कि वह अपनी बेटी की देखभाल खुद ही करता है. पहले उसकी बहन मदद करती थी, अब उसकी मां बेटी को पालने में मदद कर रही है. करतार सिंह की वकील रविता का कहना है कि कोर्ट ने अभी अंतरिम राहत दी है. अंतिम फैसला जुलाई में अगली तारीख के दौरान होगा.