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जाट आंदोलन के दौरान जूनियर ही नहीं सीनियर पुलिस अफसरों ने भी बरती लापरवाही: प्रकाश सिंह

हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में पुलिस और अफसरों की भूमिका की जांच कर रही टीम के प्रमुख यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने इंडिया टुडे से खास बातचीत में माना कि आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से बड़ी लापरवाही बरती गई.

प्रकाश सिंह, पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश प्रकाश सिंह, पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश

हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में पुलिस और अफसरों की भूमिका की जांच कर रही टीम के प्रमुख यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने इंडिया टुडे से खास बातचीत में माना कि आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से बड़ी लापरवाही बरती गई. उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान अपनी ड्यूटी ईमानदारी से नहीं निभाने वाले पुलिस वालों की पहचान कर ली गई है.

कई बड़े पुलिस अधिकारी भी रडार में
प्रकाश सिंह ने कहा कि जांच के दौरान पता चला है कि जूनियर पुलिसवालों के साथ-साथ कई सीनियर पुलिस अधिकारियों ने भी अपनी भूमिका सही से नहीं निभाई. जिस वजह से भीड़ ने आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट को अंजाम दिया. हालांकि उन्होंने जांच रिपोर्ट के बारे में विस्तार से जानकारी देने से इंकार कर दिया. प्रकाश सिंह ने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने का काम लगातार जारी है और एक हफ्ते के अंदर वो अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की पूरी कोशिश करेंगे.

जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की तैयारी जारी
प्रकाश सिंह ने कहा कि जांच के दौरान तमाम तरह के साक्ष्य जुटाए गए हैं. लापरवाही बरतने वाले पुलिस वालों की लंबी लिस्ट है. जांच के दौरान तमाम तरह के सबूत मिले हैं जिसे रिपोर्ट में जगह दी गई. उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए लिखित के साथ-साथ मौखिक तौर पर लोगों से बातचीत की गई. उन्होंने कहा कि लोगों ने सबूत को तौर पर वीडियो फुटेज भी मुहैया कराया है.

तमाम सबूत रिपोर्ट में
पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने बेबाक लहजे में कहा कि आंदोलन के दौरान कुछ अधिकारियों और पुलिस कर्मियों ने बेहतरीन काम किए थे. जो तारीफ के हकदार हैं. रिपोर्ट में ऐसे लोगों का भी जिक्र है. पूर्व डीजीपी ने बताया कि उनकी टीम ने जांच के दौरान जींद, भिवानी, झज्जर, सोनीपत, रोहतक, हिसार, कैथल और पानीपत में लोगों से बातचीत की. इन इलाकों में जाट आंदोलन के दौरान सबसे ज्यादा हिंसा हुई थी.

सरकार रिपोर्ट का सामना करने के लिए तैयार
उन्होंने कहा कि अमूमन आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए, लेकिन इसमें निजी संपत्ति को निशाना बनाते हुए व्यक्गित तौर पर भी समुदाय या व्यक्ति विशेष को टारगेट किया गया. उनसे जब पूछा गया कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद राज्य सरकार की किरकिरी नहीं होगी तो उन्होंने कहा कि सरकार सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार है तभी तो ये जांच टीम गठित की गई.

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