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फरीदाबाद: 10 हजार घरों पर संकट, जंगल की जमीन पर बने अवैध मकानों को हटाने का SC ने दिया आदेश

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश महेश्वरी की बेंच ने फरीदाबाद नगर निगम और हरियाणा पुलिस को निर्देश दिया है कि वो 6 हफ्ते के भीतर निष्कासन आदेश का पालन सुनिश्चित करें.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • खोरी गांव में अवैध निर्माण हटाने का काम हो रहा है
  • स्लम, फ़्लैट वालों ने SC में स्टे लगाने को डाली PIL
  • फरीदाबाद नगर निगम को दिया आदेश
  • जंगल की जमीन से नहीं किया जा सकता समझौता

हरियाणा के फरीदाबाद के खोरी गांव में अरावली जंगल की जमीन पर बने अवैध निर्माण को बेदखल किए जाने काम किया जा रहा है. इसे लेकर अवैध कॉलोनी, स्लमवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए कहा है कि जंगल की जमीन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने फरीदाबाद प्रशासन से कहा, अरावली जंगल में बने अवैध 10 हजार मकानों, फ्लैट्स को हटाने का निर्देश दे दिया है. जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश महेश्वरी की बेंच ने फरीदाबाद नगर निगम और हरियाणा पुलिस को निर्देश दिया है कि वो 6 हफ्ते के भीतर निष्कासन आदेश का पालन सुनिश्चित करें.

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सुप्रीम कोर्ट, खोरी गांव में स्थित स्लम और अवैध मकानों पर की जा रही कार्रवाई पर स्टे लगाने की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. ये रिट पिटीशन अनुच्छेद 32 के तहत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पुनर्वास नीति के खिलाफ दाखिल की गई है.

याचिका में दावा किया गया है कि फरीदाबाद नगर निगम ने कथित तौर पर 1700 करीब स्लम को बिना नियम का पालन किए ही ढहा दिया है

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की मांग के अनुसार अवैध निर्माण गिराए जाने के काम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. साथ ही नगर निगम से ये भी कहा है कि वो फरवरी 2020 के आदेश के अनुसार काम करे और जमीन खाली कराने के लिए उसे जिस किसी भी चीज की जरूरत होगी वो राज्य मुहैया कराएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने फरीदाबाद के DCP को भी आदेश दिया है कि वो निगम के अधिकारियों को इस काम में सुरक्षा महैया कराएंगे.

 

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