कुरुक्षेत्र NIT कैंपस, जहां छात्र अपनी सुनहरे भविष्य के सपने लेकर आते हैं, वहां इस वक्त मातम और गुस्से का माहौल है. गुरुवार की काली रात ने एक और छात्रा दीक्षा की जिंदगी छीन ली. इस खबर के फैलते ही छात्रों का सब्र टूट गया और हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए. हर तरफ बस एक ही आवाज गूंज रही थी 'वी वांट जस्टिस'. यह गुस्सा सिर्फ एक मौत का नहीं है, बल्कि पिछले दो महीनों में हुई उन चार मौतों का है, जिन्होंने कैंपस को सुसाइड पॉइंट बना दिया है.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने जो आपबीती सुनाई, वो रूह कंपा देने वाली है. छात्रों का आरोप है कि दीक्षा का शव काफी देर तक फंदे से लटका रहा, लेकिन प्रशासन के किसी भी शख्स ने उसे उतारने या अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई. दीक्षा की एक सहेली ने बताया कि जैसे ही उन्हें पता चला, उन्होंने तुरंत वार्डन को खबर की, लेकिन वार्डन ने गेट तक नहीं खोला. हद तो तब हो गई जब कॉलेज की हेल्थ टीम मौके पर पहुंची. छात्रों का कहना है कि उस टीम ने दीक्षा के पास जाकर उसे चेक करना भी जरूरी नहीं समझा, बस दूर से झांका और उसे मृत घोषित कर दिया.
छात्रों का दर्द तब और बढ़ गया जब उन्होंने इस बदइंतजामी पर प्रोफेसरों से जवाब मांगा. आरोप है कि सांत्वना देने के बजाय प्रोफेसरों ने छात्रों को डांटकर चुप करा दिया. एक छात्र ने तो यहां तक बताया कि एक प्रोफेसर ने उससे बेहद शर्मनाक बात कही कि 'अगर सुसाइड करना ही है, तो NIT के बजाय कहीं बाहर जाकर करो.' क्या एक शिक्षक की संवेदनशीलता इतनी मर सकती है? छात्रों का कहना है कि पहले हुई तीन मौतों के बाद प्रशासन ने एक कमेटी बनाई थी, लेकिन उस कमेटी ने छात्रों का दर्द समझने के बजाय बस कागजों पर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली.
क्या मामला दबाने के लिए की गई छुट्टियां?
आधी रात को जब कैंपस मुर्दाबाद के नारों से गूंज रहा था, तब भी NIT प्रबंधन अपनी हठधर्मिता पर अड़ा रहा. भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया, लेकिन प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सामने आकर छात्रों के आंसू पोंछने को तैयार नहीं दिखा. अब छात्रों का आरोप है कि इस पूरे मामले को रफा-दफा करने की साजिश रची जा रही है. हंगामे को देखते हुए प्रशासन ने बिना सोचे-समझे अचानक से छुट्टियां घोषित कर दी हैं और छात्रों को जबरदस्ती घर भेजा जा रहा है.
छात्रों का सीधा सवाल है कि क्या घर भेजने से ये चार मौतें भुला दी जाएंगी? दीक्षा ने मरने से पहले कुछ नोट्स भी छोड़े हैं, जिन्हें लेकर छात्र अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. उनकी एक ही मांग है, इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच हो और कॉलेज के खराब मैनेजमेंट को तुरंत बदला जाए.