हरियाणा विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए बीजेपी ने पूरी तरह से कमर कस ली है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 'जन आशीर्वाद यात्रा' के जरिए बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने के साथ-साथ किसानों को साधने का बड़ा दांव चला है. विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री खट्टर ने हरियाणा के करीब 10 लाख किसानों को विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा तोहफा दिया है.
मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को जन आशीर्वाद रथ यात्रा के दौरान सहकारी बैंकों के ऋणी किसानों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) का एलान किया. इस योजना के तहत कर्ज के ब्याज और जुर्माने की करीब 4750 करोड़ की राशि माफ की जाएगी. विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दांव माना जा रहा है, क्योंकि हरियाणा में किसान सत्ता बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं.
इन सहकारी बैंक से लिए गए कर्ज पर मिलेगा फायदा
प्राथमिक सहकारी कृषि समितियों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास बैंक के ऋणी किसानों को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा. किसानों के खाते इन बैंकों द्वारा एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट्स) घोषित कर दिए गए थे और किसान ऋणों को नया नहीं करवा पा रहे थे, अब इस घोषणा के बाद किसान फसलों के ऋण खातों का चक्र बदलवा सकेंगे.
बता दें कि एकमुश्त समाधान योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को तीन महीने में सहकारी बैंकों से लिए गए कर्ज की मूल राशि जमा करानी होगी. मूल ऋण की अदायगी की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2019 तय की गई है.
पांच हजार करोड़ कर्ज
मुख्यमंत्री खट्टर ने एकमुश्त समाधान योजना करने के दौरान बताया कि प्राथमिक कृषि एवं सहकारी समितियों से लगभग 13 लाख किसानों ने ऋण ले रखे हैं. जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों से प्रदेश के 85 हजार किसानों ने ऋण लिए हैं. हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास बैंक (लैंड मॉरगेज बैंक) के 1.10 लाख ऋणी किसान हैं. इन बैकों के द्वारा किसानों ने फसल के लिए कर्ज लिया है. इन किसानों के कर्ज के ब्याज और जुर्माने की राशि माफ की जाएगी.
विपक्षी दलों से छीन लिया किसानों का मुद्दा
हरियाणा की सियासत में किसान किंगमेकर माने जाते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस समेत विपक्षी दल लगातार मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को किसान विरोधी सरकार बताकर निशाना साधती रही हैं. कांग्रेस किसानों की कर्जमाफी की बात उठाती रही है.
ऐसे में मनोहर लाल खट्टर ने किसानों के कर्ज पूरी तरह से माफ करने के बजाय कर्ज के ब्याज और जुर्माने की राशि माफ करने का दांव चला है. इस फैसले से न केवल पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश की तर्ज पर ऋण माफी की मांग कर रहे किसान संगठनों को साधने में मदद मिलेगी, बल्कि विपक्षी दलों से एक बड़ा सियासी मुद्दा भी बीजेपी ने छीन लिया है.