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कुरुक्षेत्र में किसानों पर हुआ था लाठीचार्ज, भूपेंद्र हुड्डा ने खट्टर सरकार को दिया अल्टीमेटम

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कोरोना की आड़ में सरकार किसानों की आवाज दबाना चाहती है. नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने सरकार को दस दिन का अल्टीमेटम दिया. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के खिलाफ मुकदमे वापिस ले, नहीं तो आंदोलन करेंगे.

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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (फाइल फोटो) हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हरियाणा में कृषि अध्यादेश के विरोध में कुरुक्षेत्र में महाभारत
  • किसानों पर लाठीचार्ज के बाद हरियाणा की राजनीति में उफान
  • कांग्रेस ने बीजेपी-जेजेपी सरकार पर जमकर साधा है निशाना

कुरुक्षेत्र में किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है. कृषि अध्यादेश का विरोध कर रहे इन किसानों पर गुरुवार को पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था जिसमें कई किसानों को गंभीर चोटें भी लगी हैं. शुक्रवार को इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा और दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भूपेंदर सिंह हुड्डा कुरुक्षेत्र आए और सभी नेताओं ने बीजेपी को जी भर कर कोसा.

इसी मुद्दे पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ट्वीट किया, "सरकार के पास 10 दिन का समय है- किसानों पर लगाए मुकदमों को वापिस ले या विशाल किसान आंदोलन के लिए तैयार हो जाए. करोना की आड़ में किसान के खिलाफ षड्यंत्र करने वाले संभल जाएं- जनता आ रही है- 6 साल से परेशान किसान के सब्र का बांध टूटने वाला है. याचना नहीं अब रण होगा."

दरअसल, हरियाणा के किसान केंद्र के उस अध्यादेश का विरोध कर रहे हैं जिसमें मंडी में आढ़ती प्रथा को खत्म करने का आरोप लगाया जा रहा है. यानी कि व्यापारी किसान से सीधे फसल खरीद सकता है. इसके साथ ही किसान अपनी फसल को किसी भी राज्य में बेच सकता है. किसानों का आरोप है कि इस तरीके से दूसरे राज्यों के लोग हरियाणा में फसलें बेचने आएंगे और अगर मंडी और आढ़ती प्रथा खत्म हो गई तो बड़ी कंपनियां छोटे किसानों को लूट कर खा जाएंगी.

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम चढूनी ने कहा कि कुरुक्षेत्र में कृषि अध्यादेश का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस द्वारा लाठियां भांजी गईं. बेकसूर किसान जो अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए पहुंचे थे पहले उन्हें सभास्थल पर जाने से रोका गया और जब लाठी चार्ज करने के बाद भी किसान नहीं माने तो फिर उन्हें सभा करने की इजाजत दे दी गई. इस दौरन किसानों पर तीन बार लाठीचार्ज किया गया जिसमें कई किसान चोटिल हुए. किसान अपने हक की लड़ाई लड़ने आए थे. लेकिन बदले में उन्हें मिलेंगे जख्म. यह किसान आज गंभीर जख्मों के साथ सरकार को जी भर कर कोस रहे हैं.

मामला किसानों से जुड़ा हुआ है लिहाजा सुबह से ही कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने कुरुक्षेत्र में डेरा डाल लिया और खट्टर सरकार पर जमकर निशाना साधा. सुबह सवेरे कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि किसानों पर लाठीचार्ज भाजपा और दुष्यंत चोटाला की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किया है. सुरजेवाला ने कहा कि मोदी व खट्टर सरकारों ने एक षडयंत्र के तहत खेती व फसल खरीद की पूरी मंडी व्यवस्था पर हमला बोल रखा है.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस मौके पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी खेती के पूरे तंत्र को मुट्ठीभर कंपनियों के हाथ बेच देना चाहती है. इसीलिए एक साजिश के तहत कोरोना महामारी के बीचों-बीच तीन काले कानून अध्यादेश माध्यम से लाए गए, ताकि किसान-आढ़ती-मजदूर का गठजोड़ खत्म हो तथा पूरा कृषि तंत्र ही गुलामी की बेड़ियों में जकड़ दिया जाए.

थोड़ी देर बाद कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा भी क्षेत्र में पहुंचीं. कुमारी शैलजा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश सरकार किसानों का दमन कर रही है जो कांग्रेस को कतई मंजूर नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के आंदोलन को पूरा समर्थन देगी. उन्होंने पुलिस द्वारा किसानों पर किए गए लाठीचार्ज को गलत करार दिया. और कहा कि किसानों पर हो रहे जुल्म का बदला जनता जरूर लेगी.

इसके बाद पहुंचे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कोरोना की आड़ में सरकार किसानों की आवाज दबाना चाहती है. नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने सरकार को दस दिन का अल्टीमेटम दिया. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के खिलाफ मुकदमे वापिस ले, नहीं तो आंदोलन करेंगे.

हुड्डा ने कहा कि ये आंदोलन किसानों का है, हम किसान के साथ खड़े हैं. हुड्डा ने कहा कि सरकार ने किसान पर लाठी चला कर पाप किया है. हुड्डा ने कहा कि कोरोना काल के बाद 10 लाख लोगों को इकट्ठा करेंगे, पीपली में ही आंदोलन किया जाएगा. हुड्डा ने कहा कि हम कानून को मानने वाले लोग हैं. लेकिन महामारी के बाद सरकार को दिखाएंगे कि आंदोलन क्या होता है.

 

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