scorecardresearch
 

गुजरात: गीर में दो और शेरों की मौत से आंकड़ा 16 पर पहुंचा

गुजरात के गीर के जंगलों में दो और शेरों की मौत से आंकड़ा मौत का आंकड़ा 16 पहुंच गया है. शेरों के मौत की वजहों का पता अभी तक नहीं चला है, जिससे पशु-वन प्रेमी एशियाई शेरों के अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं.

एशियाई शेर (फाइल फोटो) एशियाई शेर (फाइल फोटो)

दुनिया में एशियाई शेरों के अकेले गीर के जंगलों में शेरों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं रहा है. रविवार जिन शेरों को रेस्क्यू कर जसाधार मेडिकल सेंटर में लाया गया था, उनमें से 2 और शेरों की मौत हो गई है. जिसके बाद शेरों की मौत का आंकड़ा 16 पहुंच गया.

दरअसल गुजरात अमरेली जिले में गीर के डलखानिया वन क्षेत्र में 10 दिनों के भीतर 11 शेरों के मौत की खबर से हड़कंप मच गया था. जिसके बाद तीन शेरों को रेस्क्यू भी किया गया था. रेस्क्यू किए गए शेरों की मौत के बाद आँकड़ा 14 तक पहुंच गया था. और रविवार को एक बार फिर दो और शेरो की मौत से अब यह आंकड़ा 16 को पहुंच गया है.

गौरतलब है कि शेरों की मौत के बाद वन विभाग ने 64 टीमें बनाकर शेरों का ब्यौरा लिया जा रहा था. जिसमें 7 शेर बिमार पाए गए थें. इन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट दी जा रही थी, जिसमें रविवार दो की मौत हो गई. हालांकि अब भी पांच शेर का ट्रीटमेंट जारी है.

सवाल यह है कि आखिर क्या वजह है कि गिर के एक ही रेंज, डलखानिया वन क्षेत्र में ही इतने शेरों की मौत हुई है. और डलखानिया से ही बीमार शेर भी पाए गए हैं. फ़िलहाल वन विभाग शेरों पर नज़र रखे हुए है. अब पशु एवं पर्यावरण प्रेमी शेरों के अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं गुजरात सरकार शेरों को गुजरात के बहार भेजने से साफ इंकार कर रही है.

बता दें कि साल 2010 में गिर के जंगलों में 411 शेर थें जबकि 2015 में ये संख्या बढ़कर 523 हो गई थी. ऐसे में शेरों की रहस्यमयी मौत कई सवाल खड़े करती है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें