scorecardresearch
 

सूरत: रेमडेसिविर की कालाबाजारी करते 6 गिरफ्तार, 12 हजार में बेचते थे एक इंजेक्शन

आपदा को कमाई का अवसर बनाने वाले इन सभी आरोपियों को सूरत क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है. कोविड मरीजों के लिए जीवनरक्षक कहे जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन, जिसकी कीमत 899 रुपये है कि कालाबाज़ारी कर रहे इन आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है.  

गिरफ्तार किये गए सभी आरोपी गिरफ्तार किये गए सभी आरोपी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रेमडेसिविर इंजेक्शन की हो रही कालाबाजारी
  • सूरत क्राइम ब्रांच ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया
  • 12 इंजेक्शन, 2 लाख 45 हजार रुपये कैश भी बरामद

गुजरात के सूरत में एक तरफ जहां लोग कोविड मरीजों के लिए जरूरी रेमडेसिविर इंजेक्शन पाने के लिए रात-रात भर सड़क पर पड़े रहने को मजबूर हैं तो वही दूसरी ओर 899 रुपये का रेमडेसिविर इंजेक्शन 12 हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं. कालाबाजारी कर रहे 6 लोगों को सूरत क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर नकली ग्राहक बन इस कालाबाजारी गैंग का भंडाफोड़ किया. वहीं दिल्ली से सटे गुरुग्राम में भी 3 लोगों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. 

आपदा को कमाई का अवसर बनाने वाले इन सभी आरोपियों को सूरत क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है. कोविड मरीजों के लिए जीवनरक्षक कहे जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन, जिसकी कीमत 899 रुपये है, कि कालाबाज़ारी कर रहे इन आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है.  

सूरत में बढ़ते कोरोना के बीच गंभीर मरीजों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी रेमडेसिविर इंजेक्शन की भारी कमी देखी जा रही है. यह बात खुद सूरत के पुलिस कमिश्नर अजय तोमर ने मीडिया के कैमरों के सामने कुबूल की है. अजय तोमर ने कहा कि इंजेक्शन की कमी के चलते इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग होती है. इसका पुलिस को पहले से ही अंदेशा था. इसी बीच पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर नकली ग्राहक बनकर तफ्तीश शुरू की और कड़ियां मिलती गईं. सूरत पुलिस आयुक्त का कहना है कि ये लोग मेडिकल स्टोर में पहले मना करते थे फिर ब्लेक में बेचते थे.

 कैसे होती है कालाबाजारी

जानकारी के मुताबिक इस मामले में पुलिस ने नित्या हॉस्पिटल एंड मेडिकल के मालिक विवेक धामेलिया को गिरफ्तार किया है. जो कि अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों का आधार कार्ड का उपयोग कर और डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन देकर सूरत सिविल हॉस्पिटल से सरकारी दाम 670 रुपये में यह इंजेक्शन मंगवाता था. जो मरीज डिस्चार्ज हो जाते थे या इंजेक्शन बच जाता था उसे योगेश कवाड नामक शख्स को 1500 रुपये में बेच देता था. योगेश इस इंजेक्शन को लिम्बायत के गोडादरा इलाके की फ़्यूजन पैथोलॉजी में 4000 में बेचता था. इसके बाद पैथोलॉजी चलाने वाले शैलेश हड़िया और नितिन हड़िया इसे एजेंट के जरिये 12000 रुपये में बेचते थे. 

इसी क्रम में पुलिस ग्राहक बनकर सबसे पहले पर्वत पाटिया इलाके में एक मेडिकल स्टोर के पास कल्पेश मकवाणा से मिली. मकवाणा ने 70 हजार में 6 इंजेक्शन दिलाने की बात की. मकवाणा के जरिये पुलिस प्रदीप कतरिया के पास पहुंची जो पैथोलॉजी चलाने वाले हड़िया बंधुओ का एजेंट है. एक के बाद एक कड़ियां मिलती गईं और पूरा गिरोह पुलिस के शिकंजे में आ गया. 

पुलिस को इनके पास से 12 रेमडेसिविर इंजेक्शन और 2 लाख 45 हजार रुपये कैश बरामद हुए हैं. क्राइम ब्रांच ने इनपर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें