गुजरात सरकार ने एक आदेश जारी कर कंपनियों को यह छूट दी थी कि वे बगैर अतिरिक्त मजदूरी का भुगतान किए श्रमिकों से अतिरिक्त कार्य करा सकते हैं. इसके लिए बिगड़ती अर्थव्यवस्था और कोरोना महामारी का हवाला दिया था. इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए गुजरात सरकार को तगड़ा झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के उस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि महामारी वैधानिक प्रावधानों को दूर करने और श्रमिकों को उचित मजदूरी का अधिकार प्रदान न करने का कारण नहीं हो सकता है.
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को अभूतपूर्व सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल से लेकर 20 जुलाई तक ओवरटाइम मजदूरी का भुगतान कराने के भी आदेश दिए.
गौरतलब है कि गुजरात की सरकार ने 17 अप्रैल को इससे संबंधित अधिसूचना जारी की थी. इस अधिसूचना के जरिए सरकार ने कंपनी एक्ट की कुछ शर्तों में ढील दी थी. इनमें अतिरिक्त काम के लिए ओवरटाइम मजदूरी देने की शर्त भी है.