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गुलबर्ग सोसाइटी केस: 9 जून को सजा का ऐलान, दोषियों के वकील ने कहा- 2002 का वक्त ही खराब था

सभी दोषियों को सोमवार को स्पेशल कोर्ट लाया गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे.

गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड के 24 दोषियों को अब 9 जून को अहमदाबाद की विशेष अदालत सजा सुनाएगी. कोर्ट ने इस मामले में बीते गुरुवार को 24 आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि 36 लोगों को बरी कर दिया था. बरी किए गए लोगों में बीजेपी के पार्षद बिपिन पटेल भी शामिल हैं.

मामले में सरकारी वकील और पीड़ितों के वकील की ओर से दलीलें खत्म हो गई हैं. दोषियों के वकील की दलील अभी जारी है. 9 जून को इस मामले में सुनवाई के बाद सजा का ऐलान होगा. कोर्ट में सरकारी वकील ने दोषियों को मौत की सजा देने की अपील की, जबकि पीड़ितों के वकील ने ज्यादा से ज्यादा सजा न देने की अपील की.

'घटना को 14 साल हो चुके हैं इसलिए...'
वहीं, दोषियों के वकील ने कोर्ट से कहा कि घटना को 14 साल हो चुके हैं, ऐसे में अब उन लोगों को ज्यादा से ज्यादा सजा नहीं दी जा सकती. उन्होंने कहा, 'जज साहब, 2002 का वक्त ही ऐसा था. वैसे में कोई साजिश प्री-प्लान नहीं थी, इसलिए कैपिटल पनिशमेंट नहीं बनती.'

हमले में मारे गए थे 69 लोग
28 फरवरी 2002 को भड़की हिंसा के दौरान भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था. इस हमले में 69 लोग मारे गए थे, जिनमें पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे. घटना के बाद 39 लोगों के शव बरामद किए गए थे जबकि सात साल बाद बाकी 30 लापता लोगों को मृत मान लिया गया था.

जाकिया जाफरी ने जताई असंतुष्टि
कोर्ट के फैसले पर जाकिया जाफरी ने कहा था कि वह इससे संतुष्ट नहीं हैं. उन्हें इस मामले में अभी और जद्दोजहद करनी पड़ेगी. जाफरी ने कहा, 'मुझे आधा न्याय मिला है. ये लड़ाई जारी रखेंगे. 14 साल बाद फैसला आया है, 15 साल और लगेंगे.' उन्होंने कहा था कि वह इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगी.

कुल 338 लोगों की हुई गवाही
मामले की सुनवाई साल 2009 में शुरू हुई थी, जिसमें कुल 66 आरोपी थे. इनमें से चार की पहले ही मौत हो चुकी है. मामले की सुनवाई के दौरान 338 लोगों की गवाही हुई.

मोदी को मिली थी क्लीन चिट
गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी इस मामले में आरोप लगा था, हालांकि 2010 में उनसे पूछताछ के बाद एसआईटी रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी.

SC ने दिया था 31 मई को फैसला सुनाने का निर्देश
स्पेशल एसआईटी कोर्ट के जस्टिस पी. बी. देसाई 22 सितंबर 2015 को ट्रायल खत्म होने के बाद ये फैसला सुनाएंगे. मामले की निगरानी कर रही सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी कोर्ट को 31 मई को अपना फैसला सुनाने का निर्देश दिया था.

एसआईटी ने 66 आरोपियों को किया नामजद
इस मामले में एसआईटी ने 66 आरोपियों को नामजद किया था, जिनमें से 9 आरोपी पिछले 14 साल से जेल में हैं, जबकि बाकी आरोपी जमानत पर हैं. एक आरोपी बिपिन पटेल असरवा सीट से बीजेपी का निगम पार्षद है. 2002 में दंगों के वक्त भी बिपिन पटेल निगम पार्षद था. पिछले साल उसने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की.

कोर्ट ने खारिज की थी दो आरोपियों की अर्जी
पिछले हफ्ते कोर्ट ने नारायण टांक और बाबू राठौड़ नाम के दो आरोपियों की ओर से दायर वह अर्जी खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए नार्को एनालिसिस और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की गुहार लगाई थी. कोर्ट ने कहा कि अब जब फैसला आने वाला है तो इसकी जरूरत नहीं है.

इन लोगों को कोर्ट ने करार दिया है दोषी-
1. कैलाश लालचंद धोबी
2. योगेंद्र सिंह उर्फ लालू मोहनसिंह शेखावत
3. जयेश कुमार उर्फ गब्बर मदनलाल जिगर
4. कृष्ण कुमार उर्फ कृष्णा मुन्ना लाल
5. जयेश रामजी परमार
6. राजू उर्फ मामो कानीयो
7. नारण सीताराम टांक
8. लाखणसिंह उर्फ लाखीयो
9. भरत उर्फ भरत तैली बालोदीया
10. भरत लक्ष्मणसिंह गोडा
11. दिलीप प्रभुदाश शर्मा
12. बाबुभाई मनजीभाई पटणी
13. मांगीलाल धुपचंद जैन
14. दिलीप उर्फ काणु चतुरभाई
15. संदिप उर्फ सोनू
16. मुकेश पुखराज सांखला
17. अंबेस कांतिलाल जीगर
18. प्रकाश उर्फ कली खेंगारजी पढीयार
19. मनीष प्रभुलाल जैन
20. धमेश प्रहलादभाई शुक्ल
21.
कपिल देवनारायण उर्फ मुन्नाभाई मिश्रा
22. अतुल इंद्रवधन वैध
23. बाबूभाई हस्तीमल राठौड़
24. सुरेंद्र सिंह उर्फ वकील दिग्विजय सिंह चौहान.

जानिए, गुलबर्ग सोसाइटी दंगा मामले में कब क्या हुआ?
-गोधरा कांड के एक दिन बाद यानी 28 फरवरी, 2002 को 29 बंगलों और 10 फ्लैट वाली गुलबर्ग सोसायटी पर हमला हुआ. गुलबर्ग सोसायटी में सभी मुस्लिम रहते थे, सिर्फ एक पारसी परिवार रहता था. यहां पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी भी रहते थे.

-20,000 से ज्यादा लोगों की हिंसक भीड ने पूरी सोसायटी पर हमला किया. ज्यादातर लोगों को जिंदा जला दिया. 39 लोगों के शव बरामद हुए और अन्य को गुमशुदा बताया गया, लेकिन 7 साल बाद भी उनके बारे में कोई जानकारी न मिलने पर उन्हें मृत मान लिया गया. अब कुल मौतों का आंकडा 69 है. मरनेवालों में एहसान जाफरी भी थे.

-8 जून, 2006 को ज़किया जाफरी और एहसान जाफरी की पत्नियों ने पुलिस को एक फरियाद दी, जिसमें कहा कि इस हत्याकांड के लिए मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और कई मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया. पुलिस ने ये फरियाद लेने से मना कर दिया.

-7 नवंबर, 2007 को गुजरात हाईकोर्ट ने भी इस फरियाद को एफआईआर मानकर जांच करवाने से इनकार कर दिया.

-26 मार्च, 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के 10 बडे केसों की जांच के लिए आर के राघवन की अध्यक्षता में एक एसआईटी बनाई. इनमें गुलबर्ग का मामला भी था.

-मार्च 2009 में ज़किया की फरियाद की जांच करने का जिम्मा भी सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को सौंपा.

-सितंबर 2009 को ट्रायल कोर्ट में गुलबर्ग हत्याकांड की सुनवाई शुरू हुई.

27 मार्च 2010 को नरेंद्र मोदी को एसआईटी ने ज़किया की फरियाद के संदर्भ में समन जारी किया औऱ कई घंटों तक पूछताछ हुई.

-14 मई 2010 को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की.

- जुलाई 2011 में एमीकस क्यूरी राजु रामचन्द्रन ने इस रिपोर्ट पर अपनी नोट सुप्रीम कोर्ट में रखी.

-11 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला ट्रायल कोर्ट पर छोड़ा.

-8 फरवरी 2012 को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश की.

-10 अप्रैल 2012 को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने एसआईटी की रिपोर्ट को माना कि मोदी और अन्य 62 लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं.

-इस मामले में 66 आरोपी हैं, जिसमें प्रमुख आरोपी बीजेपी के असारवा के काउंसलर बिपिन पटेल भी हैं.

-इस मामले के 4 आरोपियों की ट्रायल के दौरान मौत हो गई.

-आरोपियों में से 9 अब भी जेल में हैं, जबकि अन्य सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं.

-इस मामले में 338 से ज्यादा गवाहों की गवाही हुई है.

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