गुजरात सरकार भले ही हर घर में नल और पानी पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जमीनी हकीकत दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर आपकी रूह कांप जाएगी. गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर बसे वलसाड ज़िले के दूर-दराज के कपराडा तहसील से विकास के दावों की पोल खोलती तस्वीरें सामने आई हैं.
कपराडा तालुका का मोती पलसन गांव, जहां मॉनसून में सबसे ज़्यादा बारिश होती है और जिसे गुजरात का चेरापूंजी कहा जाता है, वहां के लोग आज चिलचिलाती गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. यहां फलिया की महिलाएं जान जोखिम में डालकर 45 फीट गहरे कुएं में उतरकर पानी भरने को मजबूर हैं. करोड़ों की नल से जल योजना यहां सिर्फ़ कागज़ों पर ही दिख रही है.
गांव के बच्चे, औरतें, आदमी, आज अपनी प्यास बुझाने के लिए हर दिन मौत के मुंह में जाते हैं. करीब 1200 की आबादी वाले इस फलिया में करीब 8 सरकारी कुएं हैं, लेकिन गर्मी आते ही सभी कुएं उथले हो गए हैं. कुओं का पानी सूखने से अब औरतें लोहे की सीढ़ी और रस्सी बांधकर 45 फीट गहरे कुएं के अंदर उतरती हैं, जबकि दूसरे कुएं में लोहे की रॉड पकड़कर जान जोखिम में डालकर खड्डों तक पहुंचती हैं.
कुएं के पथरीले खड्डों में जो थोड़ा-बहुत पानी इकट्ठा होता है, उसे मटकों में भरकर ऊपर लाया जाता है. इस जद्दोजहद में अक्सर औरतें फिसलकर कुएं में गिर जाती हैं और उन्हें गंभीर चोटें लगती हैं, फिर भी अधिकारियों की आंखें नहीं खुलतीं. पिछले 2 महीने से यहां पानी की कीमत ज्यादा हो रही है.
पानी के लिए लंबी लाइन
सुबह और शाम कुएं पर पानी भरने के लिए औरतों की लंबी लाइनें लग जाती हैं. जैसे-जैसे कुएं में बूंद-बूंद पानी जमा होता है, औरतें उसे भरती जाती हैं. हालात इतने खराब हैं कि एक परिवार को सिर्फ एक से दो बाल्टी पानी भरने के लिए 1 से 2 घंटे तक कुएं पर इंतजार करना पड़ता है. गांव की औरतें अपने मासूम बच्चों को साथ लेकर दिन भर चिलचिलाती धूप में कुएं के किनारे बैठने को मजबूर हैं.
सर्दी खत्म होते ही शुरू होने वाली यह मुश्किल मॉनसून आने तक ऐसे ही हालत देखने को मिलती हे. लोगों का कहना हे कि पिछले 2 दिनों अब सरकार पानी की व्यवस्था हमारे लिए कर रहीं है.
समस्या के बीच सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और सरकार की योजनाओं पर उठ रहा है. कपराडा और धरमपुर के दूर-दराज के इलाकों के लिए करोड़ों रुपये की लागत से एक बड़ी 'अस्टोल ग्रुप वॉटर सप्लाई स्कीम' तैयार की गई थी. करीब 586 करोड़ रुपये की इस स्कीम के तहत मोती पलसन गांव के हर घर में नल तो लग गए हैं, लेकिन आज तक इन नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं. पिछले 2 दिनों से पानी की सप्लाई सरकार द्वारा की जा रही है.
(Input: Kaushik Joshi)