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गुजरात चुनाव से पहले शुरू हुआ नेताओं के पलायन का दौर, कांग्रेस में शामिल हुआ ये आदिवासी चेहरा

गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा फायदा हुआ है. आदिवासी समाज के बड़े नेता माने जाने वाले राजेश वसावा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है.

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राजेश वसावा ने कांग्रेस का दामन थामा राजेश वसावा ने कांग्रेस का दामन थामा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 15 से 20 सीटों पर आदिवासियों का असर
  • भूपेंद्र सरकार में आदिवासी समाज से 5 मंत्री

इस साल के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. इस बार लड़ाई सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच नहीं है बल्कि आम आदमी पार्टी भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का प्रयास कर रही है. इस बीच चुनाव से ठीक पहले नेताओं के पलायन का दौर भी शुरू हो गया है. भारतीय ट्राइबल पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  राजेश वसावा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है.

उनका कांग्रेस में आना इसलिए मायने रखता है क्योंकि गुजरात की राजनीति में जब भी आदिवासियों के हक की बात आती है, राजेश वसावा ने हर बार उनके मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है. आदिवासी समाज में उनकी लोकप्रियता काफी ज्यादा देखी जाती है. इसी वजह से अब जब राजेश वसावा ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है, इसे चुनावी लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.

कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद राजेश वसावा ने कहा है कि हमारी यह लड़ाई हमारे अस्तित्व को बचाने की है. हम आदिवासी के हक की बात करते हैं, हमे आदिवासियों को हक दिलाना चाहते हैं. सालों से आदिवासियों के हक की लडाई कांग्रेस करती आयी है. इस लिए ये फैसाल किया और आज कांग्रेस ज्वाइन कर ली.

वहीं कांग्रेस नेता रधु शर्मा भी राजेश वसावा का पार्टी में आना काफी अहम मानते हैं. उनके मुताबिक मोदी सरकार ने आदिवासियों की भलाई के लिए कोई कदम नहीं उठाया, ऐसे में अब कांग्रेस पार्टी राजेश वसावा के साथ मिलकर आदिवासियों की आवाज उठाएगी, उनके हक के लिए लड़ेगी.

गुजरात में आदिवासी फैक्टर की बात करें तो दक्षिण गुजरात, मध्य गुजरात और उत्तर गुजरात में करीबन 15 से 20 सीटों पर आदिवासियों का प्रभाव देखने को मिलता है. इन सीटों पर हार-जीत का अंतर इसी बात से तय हो जाता है कि आदिवासी वोटर किस ओर गया है. इसी वजह से कोई भी पार्टी आदिवासियों को नाराज नहीं करना चाहती है.

अभी वर्तमान में भूपेंद्र पटेल सरकार में 5 आदिवासी मंत्री मौजूद हैं. सरकार का पूरा प्रयास है कि कांग्रेस के मजबूत गढ़ में अपनी सेंधमारी की जाए, अब कितना सफल हो पाते हैं, ये चुनाव के दौरान साफ हो जाएगा. 

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