गुजरात में शराब के बाद अब गांजे की तस्करी के केस सामने आ रहे हैं. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश सीमा पर गांजे की अवैध खेती और तस्करी का भांडा फोड़ा है. टीम ने नारोल सर्कल के पास से 2.03 करोड़ रुपये कीमत का 406 किलोग्राम गांजा जब्त किया है.
ओडिशा के बाद अब मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित करमाला में भी गांजे की खेती शुरू हो गई है. करमाला में तैयार किया गया गांजा 8 महीने में दूसरी बार अहमदाबाद सप्लाई किया जा रहा था. हालांकि गांजे को उसके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने से पहले ही क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को गांजे समेत दबोच लिया.
पुलिस ने कहा कि गांजे की सप्लाई के लिए पायलट प्रोजेक्ट भी चलाया जा रहा था. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने प्याज की आड़ में गांजे की तस्करी करने वाले इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया और आरोपी दीपक जाट और सतीश पवार को गिरफ्तार किया. दोनों आरोपी महाराष्ट्र के धुले जिले के निवासी हैं.
करमाला के पहाड़ी क्षेत्र में हो रही थी गांजे की खेती
क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि इसका मुख्य आपूर्तिकर्ता गांजे की आपूर्ति के लिए गांजे की गाड़ी से एक किलोमीटर दूर गाड़ी चला रहा था. करमाला के पहाड़ी क्षेत्र में गांजे की अवैध खेती की जा रही थी और ये गांजा सागर पवार और शांताराम पवार के जरिए भेजा जा रहा था.
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स्पेशल स्ट्रेटैजी के तहत करते थे गांजा तस्करी
शांताराम पवार गांजे से लदी गाड़ी के आगे-आगे गाड़ी चला रहा था, ताकि ये जानकारी मिल सके कि गांजा जब्त करने के लिए रास्ते में कोई पुलिस टीम तो नहीं आ रही है. लेकिन जब गांजे से लदी गाड़ी नारोल सर्कल पहुंची और पुलिस ने उसे रोका तो वो तेजी से वहां से भाग गया. शांताराम ने अपना फोन बंद कर दिया और वहां से फरार हो गया.
अहमदाबाद पहुंचने से पहले ही गांजा जब्त
आरोपियों से पूछताछ के दौरान ये बात सामने आई कि शांताराम ने आठ महीने पहले अहमदाबाद में भारी मात्रा में गांजा की आपूर्ति की थी. लेकिन गांजा अहमदाबाद पहुंचने और बिकने से पहले ही पुलिस ने उसे फिर से पकड़ लिया. गांजा तस्करी करते पकड़े गए दो आरोपी दीपक और सतीश को गांजे की एक खेप के लिए 50 हजार रुपये मिलने थे.
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शांताराम और सागर हर बार एक नया आपूर्तिकर्ता ढूंढकर गांजे की तस्करी करते थे, ताकि पुलिस को गांजे की सूचना न मिले.