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नए मुख्यमंत्री को लेकर आनंदी-शाह के बीच मीटिंग में हुई तकरार, विजय रुपानी रविवार को लेंगे शपथ

आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे नितिन पटेल शुक्रवार को पार्टी विधायकों की मीटिंग में हिस्सा लेने बीजेपी दफ्तर पहुंच चुके हैं. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी कुछ ही देर में यहां पहुंच सकते हैं.

विजय रुपानी विजय रुपानी

विजय रुपानी गुजरात के नए मुख्यमंत्री होंगे. आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद से गुजरात के नए मुख्यमंत्री को लेकर बीजेपी की माथापच्ची सुलझ गई है. शुक्रवार शाम गांधीनगर बीजेपी दफ्तर में पार्टी के विधायक दल की बैठक के बाद रुपानी के नाम की घोषणा की गई. इसके साथ ही अब तक सीएम की रेस में सबसे आगे माने जाने वाले नितिन पटेल को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा. रुपानी रविवार को शपथ ग्रहण करेंगे.

ऐसे बनी बात
बीजेपी विधायक दल की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और आनंदीबेन पटेल ने भी शि‍रकत की. बताया जाता है कि सीएम के नाम को लेकर विधायक दल की बैठक में आनंदीबेन और अमित शाह के बीच तकरार हुई. शाह रुपानी को सीएम बनाने पर अड़े थे तो आनंदी नितिन को अपना उत्तराध‍ि‍कारी बनाना चाहती थीं. फिर वी सतीश ने पीएम मोदी को फोन किया और आनंदीबेन से उनकी बात कराई गई. आखिरकार अमित शाह के करीबी माने जाने वाले विजय रुपानी को सीएम और नितिन पटेल को डिप्टी सीएम बनाने के फॉर्मूले पर सहमति बनी.

जो न कर सकीं आनंदीबेन, वो करना होगा रुपानी को
गुजरात के मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठने जा रहे विजय रुपानी की अगली राह आसान नहीं होगी. उन्हें वो काम करने होंगे, जो आनंदीबेन न कर सकीं. रुपानी के लिए सबसे अहम कामों में सुशासन देना, सरकार से नाराज चल रहे पटेल और दलित समुदाय को शांत करना और सरकार-पार्टी के बीच संबंधों को मजबूत बनाना शामिल हैं. बीजेपी को मुख्यमंत्री पद के लिए ऐसे चेहरे की सख्त जरूरत थी जो पाटीदारों और दलितों को शांत कर सके. लेकिन गैर-पाटीदार समुदाय से आने की वजह से रुपानी के लिए ये काम आसान नहीं होगा.

कौन हैं विजय रुपानी?
आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद विजय रुपानी को गुजरात के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर चुना गया है. गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष विजय रुपानी की संगठन में अच्छी पकड़ है. रुपानी राजकोट पश्चिम से विधायक हैं. उनके पास गुजरात सरकार में परिवहन, वॉटर सप्लाई और लेबर एंड एम्प्लॉय जैसे मंत्रालय भी हैं.

अनुभव के साथ ही विश्वसनीय चेहरा हैं रुपानी
आनंदीबेन के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में पार्टी का संगठन कमजोर हो रहा था. बीजेपी की अंदरूनी उठापठक हाईकमान के पास जा रही थी. यही वजह थी कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए विजय रुपानी को अध्यक्ष बनाया गया. हालांकि विजय रुपानी खुद सरकार में भी परिवहन मंत्री की भूमिका में हैं. ऐसे में सरकार चलाने का अनुभव भी उनके पास करीब एक साल का है.

शाह के करीबी भी हैं रुपानी
विजय रुपानी का नाम इसलिए भी सब से ऊपर लिया जा रहा था कि वो अमित शाह के करीबियों में से एक हैं. साथ ही सरकार और संगठन का समन्वय वो बखूबी कर रहे हैं. यहां तक कि पिछले दिनों सरकार की जितनी भी महत्वपूर्ण योजनाएं घोषित की गईं, वो सभी आनंदीबेन पटेल की जगह विजय रुपानी ने ही की. हालांकि जानकार ये भी मान रहे हैं कि गैर-पाटीदार समुदाय से मुख्यमंत्री बनाए जाने पर बीजेपी को गुजरात में पाटीदार वोटों का नुकसान भी झेलना पड़ सकता है.

पीएम मोदी के चहेते हैं पटेल
दूसरी ओर, डिप्टी सीएम के तौर पर चुने गए गुजरात सरकार में मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते हैं. नरेंद्र मोदी की आनंदीबेन पटेल के बाद नितिन पटेल पहली पसंद बताए जा रहे थे. पिछले दिनों राजनीतिक उठापटक के बाद आनंदीबेन पटेल ने सोशल मीडिया के जरिए गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हटने की इच्छा जाहिर की थी.

गुजरात सरकार में सबसे अनुभवी मंत्री हैं पटेल
नितिन पटेल गुजरात में आज के राजनैतिक हालात सबसे बेहतर मुख्यमंत्री पद उम्मीदवार बताए जा रहे थे. सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी की पसंद नितिन पटेल इस लिए भी थे कि वो वर्तमान में गुजरात सरकार में सबसे अनुभवी और वरिष्ठ मंत्री भी हैं. दूसरी बात जो नितिन पटेल के पक्ष में जाती थी वो ये कि वो समय-समय पर गुजरात सरकार के सभी विभागों के मंत्री रह चुके हैं.

विधानसभा चुनाव पर पार्टी की नजर
नितिन पटेल गुजरात के मेहसण्डा जिले के रहने वाले हैं और मेंहसण्डा पाटीदार आंदोलन का गढ़ है. पार्टी नेतृत्व का ये भी मानना था कि नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाने से पाटीदार आंदोलन कमजोर पड़ेगा. पार्टी का ये भी मानना था कि पटेल की जगह किसी और जाति के नेता मुख्यमंत्री बनाने से पाटीदार आंदोलन एक बार फिर से तेजी पकड़ लेगा.

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