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15 लाख जुर्माने पर विजय रूपाणी की सफाई, कहा- सेबी ने नहीं दिया समय

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शेयर बाजार नियामक सेबी द्वारा एक फर्जीवाड़े के मामले में जुर्माना वसूले जाने के खिलाफ अपनी सफाई पेश की है. रूपाणी के मुताबिक फर्जीवाड़े के तथाकथित मामले में जांच के दौरान अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया. अपनी सफाई में विजय रुपाणी ने सिक्योरिटीज एपिलेट ट्रिब्यूनल का हवाला देते हुए दावा किया है कि ट्रिब्यूनल ने सेबी के आदेश को रद्द कर दिया है.

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विजय रूपाणी (फोटो- पीटीआई) विजय रूपाणी (फोटो- पीटीआई)

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शेयर बाजार नियामक सेबी द्वारा एक फर्जीवाड़े के मामले में जुर्माना वसूले जाने के खिलाफ अपनी सफाई पेश की है. रूपाणी के मुताबिक फर्जीवाड़े के तथाकथित मामले में जांच के दौरान अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया. अपनी सफाई में विजय रुपाणी ने सिक्योरिटीज एपिलेट ट्रिब्यूनल का हवाला देते हुए दावा किया है कि ट्रिब्यूनल ने सेबी के आदेश को रद्द कर दिया है.

विजय रुपाणी ने लिखित बयान जारी करते हुए कहा है कि सारंग केमिकल्स के शेयर्स ट्रांजैक्शन में फर्जीवाड़े के सेबी के फैसले को सिक्योरिटीज एपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया है. रुपाणी के बयान के मुताबिक उनके एचयूएफ अकाउंट से सारंग केमिकल्स के शेयर्स में टोटल ट्रांजेक्शन महज 0.1 फीसदी का है वहीं इस ट्रांजैक्शन में उनके एचयूएफ अकाउंट में कोई बड़ा मुनाफा नहीं दर्ज है.

विजय रुपाणी ने अपनी सफाई में कहा है कि 2009 में उनके एचयूएफ ने महज 63,000 रुपये के शेयर्स खरीदे थे और2011 में उन्हें 35,000 रुपये में बेच दिया था. इसमें उन्हें कुल 28,000 रुपये का घाटा हुआ था. रूपाणी ने सफाई में कहा है कि 'जिस शेयर का सट्टा होता हो उसमें करोडो रुपये का ट्रांजैक्शन किया जाता है. लेकिन उनके ट्रांजैक्शन में किसी तगड़े मुनाफे का हवाला नहीं है.

रुपाणी की सफाई के मुताबिक उनके एचयूएफ ने स्टॉक एक्सचेंज से डिलेवरी लेकर अपने डीमेट अकाउंट में पूरा ट्रांजैक्शन टैक्स भरते हुए शेयर की खरीदारी की है. रूपाणी ने कहा कि उनके एचयूएफ द्वारा किसी प्रकार से सेबी के गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं किया गया है और न ही कोई गैरकानूनी ट्रांजैक्शन किया गया.

रूपाणी ने अपनी सफाई में यह भी दावा किया है कि 6 साल बाद सेबी के एक अधिकारी ने विजय रुपाणी समेत 22लोगों को सुनवाई का मौका दिए बिना एकतरफा आदेश जारी करके यह पेनाल्टी लगाई है. इसके खिलाफ ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाने के बाद उन्हें राहत मिली है क्योंकि ट्रिब्यूनल ने सेबी के आदेश को रद्द कर दिया है.

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