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पकड़ा गया विजय रूपाणी का HUF फ्रॉड, SEBI ने लगाया 15 लाख जुर्माना

सेबी के मुताबिक रूपाणी की एचयूएफ का सारंग केमिकल्स नाम की कंपनी के साथ व्यापारिक हेर-फेर करने का आरोप है. सेबी के मुताबिक रूपाणी और सारंग केमिकल्स के बीच हेर-फेर वाले ट्रांजैक्शन जनवरी 2011 से जून 2011 के बीच किया गया.

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फर्जी ढ़ंग से कारोबार करते पाया गया मुख्यमंत्री का एचयूएफ फर्जी ढ़ंग से कारोबार करते पाया गया मुख्यमंत्री का एचयूएफ

गुजरात विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शेयर बाजार नियामक सेबी ने 22 कंपनियों के खिलाफ 6.9 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. इन कंपनियों में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) पर भी 15 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है.  

सेबी के मुताबिक रूपाणी की एचयूएफ का सारंग केमिकल्स नाम की कंपनी के साथ व्यापारिक हेर-फेर करने का आरोप है. सेबी के मुताबिक रूपाणी और सारंग केमिकल्स के बीच हेर-फेर वाले ट्रांजैक्शन जनवरी 2011 से जून 2011 के बीच किया गया.

रूपाणी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान अगस्त 2016 में संभाली थी. वहीं मई 2016 में सेबी ने विजय रूपाणी समेत सभी कंपनियों को शो कॉज नोटिस दिया था.

जांच से जुर्माने तक

सेबी ने रूपाणी और सारंग केमिकल्स के खिलाफ 3 जनवरी से लेकर 8 जून 2011 तक जांच की. यह जांच सारंग केमिकल्स के शेयर्स की खरीद-फरोख्त में हुई तथाकथित धांधली के चलते की गई थी. इस जांच के लगभग 4 साल बाद 13 जुलाई 2015 को न्यायिक निर्णय लेते हुए ट्रांजैक्शन करने वाली दोनों पार्टियों को हेर-फेर में लिप्त घोषित किया जिसके बाद 6 मई 2016 को सेबी ने सभी कंपनियों समेत विजय रूपाणी के एचयूएफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया. हालांकि विजय रूपाणी की तरफ से इस नोटिस का कोई जवाब सेबी को नहीं दिया गया. जिसके चलते 27 अक्टूबर 2017 को सेबी ने विजय रूपाणी के एचयूएफ पर 15 लाख रुपये के जुर्माने का आदेश जारी किया.

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सेबी के मुताबिक जांच प्रक्रिया के दौरान विजय रूपाणी और उनके ऑफिस को किए गए फोन, ईमेल, टेलिग्राम इत्यादि का कोई जवाब नहीं मिला. वहीं विजय रूपाणी एचयूएफ के खिलाफ सेबी ने शेयर मार्केट में भ्रामक पहचान के साथ कारोबार करने और  सारंग केमिकल्स के शेयर्स की आपस में खरीदारी कर फर्जीवाड़ा करने का आरोप सही पाया है.

क्या है एचयूएफ?

हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) इनकम टैक्स में बचत करने का बेहद कारगर तरीका है. एचयूएफ बनाने के लिए परिवार के मुखिया के नाम पर एक बैंक खाता खुलवाया जाता है. गौरतलब है कि इस खाते में मुखिया के नाम के आगे एचयूएफ शब्द जोड़ दिया जाता है. इस खाते के बाद एचयूएफ के नाम एक नया पैन कार्ड बनवाया जाता है जिसमें मुखिया के नाम के आगे एचयूएफ लगा रहता है.

क्या कहता है इनकम टैक्स नियम?

इनकम टैक्स नियम के मुताबिक किसी हिन्दू परिवार में पिता अथवा वरिष्ठ पुरुष सदस्य को एचयूएफ का मुखिया बनाया जाता है. यह मुखिया एचयूएफ में बतौर मैनेजर परिवार की अगुवाई करता है और परिवार के अन्य सदस्य आपस में पार्टनर की भूमिका में रहते हैं. इनकम टैक्स नियम के मुताबिक इस तरह बने एचयूएफ को किसी आम आदमी की तरह टैक्स में लाभ मिलता है. वहीं वसीयत में मिली बड़ी संपत्ति को एचयूएफ के जरिए रखने पर भी बड़ा लाभ उठाया जा सकता है.

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