SBI की ओर से नई भर्ती और पदोन्नति नीति में बदलाव के विरोध में DCW की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने शनिवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को नोटिस जारी किया है. साथ ही बैंक के इस फैसले को महिला विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की. हालांकि विवाद बढ़ने पर बैंक ने अब इस नियम के अमल पर रोक लगा दी है.
आयोग ने मामले में मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए बैंक को नोटिस जारी किया है. दरअसल, आयोग को पता चला कि SBI ने 31 दिसंबर 2021 को जारी एक पत्र के माध्यम से अपनी भर्ती और पदोन्नति नीति में बदलाव किया था. साथ ही आयोग ने बैंक को 48 घंटे का समय देते हुए मामले में रिपोर्ट देने के लिए कहा है.
क्या कहती है बैंक की नई नीति?
इस नई नीति के मुताबिक जिसमें कहा गया था कि 3 महीने से अधिक गर्भवती महिला को ज्वॉइनिंग के लिए 'अस्थायी रूप से अयोग्य' माना जाएगा. उसे प्रसव के 4 महीने बाद ही बैंक में ज्वाइनिंग की अनुमति दी जा सकती है. लिहाजा गर्भवती महिला कैंडिडेट को चयनित होने के बावजूद बैंक में तुरंत ज्वॉइनिंग नहीं दी जाएगी.
आयोग ने बैंक की नीति पर क्या कहा?
आयोग ने कहा कि ये नीति संविधान के तहत महिलाओं को प्रदान किए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. यही नहीं बैंक नई नीति 'सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020' के तहत महिलाओं को प्रदान किए गए मातृत्व लाभों का भी उल्लंघन करती है. साथ ही लिंग के आधार पर भेदभाव करती है. आयोग ने बैंक के इस कदम को मनमाना करार दिया. साथ ही नीति में तत्काल संशोधन करते हुए इसे वापस लेने को कहा.
नीति वापस लेने को कितना समय दिया?
आयोग ने नीति को तैयार करने और उसे पास करने वाले अफ़सरों की जानकारी भी मांगी है. साथ ही आयोग ने एसबीआई से नीति वापस लेने और संशोधन के लिए उठाए जा रहे कदमों का विवरण भी मांगा है. आयोग ने बैंक को 48 घंटे का समय देते हुए मामले में Action taken Report और बैंक की नई और पुरानी भर्ती नीति या नियमों की सूची भी मांगी है.
बैंक के फैसले को आयोग की टिप्पणी
DCW अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा यह स्वीकार्य नहीं है कि एक गर्भवती महिला को 'अस्थायी रूप से अनफिट या अयोग्य' कहा जाए. सिर्फ गर्भवती होने के कारण उसे काम करने के अवसरों से वंचित किया जाए, यह पितृ सत्तात्मक मानसिकता और महिला विरोधी सोच को दर्शाता है.