1984 के सिख विरोधी दंगों के जख्म आज भी उतने ही हरे हैं. एक बेटी जिसने अपने पिता को जिंदा जलते देखा, एक पत्नी जो जवानी में विधवा हो गई और वे परिवार जिन्होंने अपनों को खोकर चार दशक इंसाफ के इंतजार में गुजार दिए, ये सभी गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत के बाहर खड़े थे. आंखों में आंसू, दिल में गुस्सा और न्याय व्यवस्था से टूटा हुआ भरोसा. 40 साल से न्याय का इंतजार कर रहे इन परिवारों के लिए दिल्ली की एक अदालत का फैसला घावों को फिर से हरा करने जैसा रहा.
अदालत ने जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान हिंसा भड़काने के आरोपी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को एक मामले में बरी कर दिया. हालांकि, सज्जन कुमार अन्य मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और जेल में ही रहेंगे, लेकिन इस विशेष मामले में आए फैसले ने पीड़ितों को झकझोर कर रख दिया है.
आंखों के सामने जलते देखे अपने
अदालत के बाहर खड़ी निर्मल कौर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, “मेरे पिता को मेरी आंखों के सामने जिंदा जला दिया गया. पिछले 42 साल से मैं एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट में भटक रही हूं, इस उम्मीद में कि कभी तो इंसाफ मिलेगा.” रोते हुए उन्होंने कहा कि उस दिन उनका पूरा परिवार बर्बाद हो गया और जीवन की हर खुशी उनसे छीन ली गई.
उनके पास खड़ी एक अन्य महिला ने गुस्से और दर्द के साथ कहा कि जिस व्यक्ति को वह इस नरसंहार का जिम्मेदार मानती हैं, उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे कोर्ट के बाहर ही डटी रहेंगी, चाहे उन्हें यहीं क्यों न दम तोड़ना पड़े क्योंकि खोने के लिए अब कुछ बचा ही नहीं है.
पीड़ित परिवार के सदस्य वजीर सिंह ने कहा कि सज्जन कुमार पर करीब 18 हत्या के मामले दर्ज हुए, लेकिन वह बार-बार बच निकलते रहे. उन्होंने कहा, “हजारों सिखों की हत्या के लिए वही जिम्मेदार हैं. हमारी पूरी ज़िंदगी अदालतों के चक्कर काटते हुए गुजर गई. अगर हमें इंसाफ नहीं मिला तो हम हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे."
'सड़कों पर बिछी थीं लाशें'
एक अन्य महिला बागी कौर ने बताया कि दंगों की यादें आज भी उन्हें झकझोर देती हैं. उन्होंने कहा, “मेरे परिवार के दस लोगों को मार दिया गया. सड़कों पर लाशें पड़ी थीं, रास्ता पार करने के लिए शवों के ऊपर से कूदना पड़ता था. 42 साल में ऐसा एक भी दिन नहीं गया जब मैं किसी वजह से अदालत की सुनवाई में शामिल न हुई हों."
किस मामले में बरी हुए सज्जन कुमार?
बता दें कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को दो लोगों की मौत के मामले में बरी कर दिया. यह मामला फरवरी 2015 में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा दर्ज की गई दो एफआईआर से संबंधित था. स्पेशल जज दिग्विनय सिंह की अदालत ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया. सज्जन कुमार के खिलाफ पहली एफआईआर 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और अवतार सिंह की हत्या और दूसरी 2 नवंबर 1984 को गुरचरण सिंह को जिंदा जलाने की घटना के लिए थी.
सज्जन कुमार ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ एक भी सबूत नहीं है और वह सपने में भी ऐसी हिंसा में शामिल होने की बात नहीं सोच सकते. उन्होंने जांच एजेंसी पर निष्पक्ष जांच न करने का भी आरोप लगाया था. कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इस मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था.