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किसान मोर्चा ने कहा- सरकार ने MSP पर कोई कमेटी नहीं बनाई, 31 जनवरी को होगा आंदोलन

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने आज एक बैठक की और प्रेस कान्फ्रेंस कर सरकार पर कई आरोप लगाए. किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार वादाखिलाफी कर रही है. उनसे किए गए वादों पर अब तक कुछ नहीं हुआ है. अगर सरकार ने मांगों को समय से पूरा नहीं किया तो सरकार के विरोध में फिर आंदोलन शुरू किया जाएगा.

राकेश टिकैत. (फाइल फोटो) राकेश टिकैत. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा- सरकार कर रही वादाखिलाफी
  • चेतावनी देकर कहा- मांगें पूरी न हुईं तो शुरू करेंगे आंदोलन

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आज एसकेएम के कार्यक्रमों और भविष्य की दिशा को लेकर कई अहम फैसले लिए गए. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है. संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि एमएसपी पर कोई कमेटी नहीं बनी. कोई संपर्क नहीं हुआ और न ही मुकदमे वापस हुए. किसान नेताओं ने कहा कि वे सरकार को एक फरवरी तक का समय देते हैं. अगर सरकार ने किसानों से किए गए अपने वादे समय से पूरे नहीं किए तो 31 जनवरी को सरकार के विरोध में धरना प्रदर्शन करेंगे.

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि 23 और 24 फरवरी को ट्रेड यूनियनों द्वारा घोषित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन करेगा. मोर्चा ने कहा कि भारत सरकार ने 9 दिसंबर के पत्र के किसी भी वादे को पूरा नहीं किया, जिसके आधार पर हमने मोर्चा वापस लेने का फैसला किया. आंदोलन के दौरान मामले को तत्काल वापस लेने के वादे पर केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और हिमाचल सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है. हरियाणा सरकार ने कुछ कागजी कार्रवाई ही की है. बाकी राज्य सरकारों को केंद्र सरकार का पत्र भी नहीं मिला है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने शहीद किसानों के परिवारों को मुआवजा देने पर कोई कार्रवाई शुरू नहीं है. एमएसपी के मुद्दे पर सरकार ने न तो समिति के गठन की घोषणा की है और न ही कोई जानकारी दी है. एसकेएम ने फैसला किया है कि 31 जनवरी को देश भर में विश्वासघात दिवस मनाया जाएगा और जिला और ब्लॉक स्तर पर बड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे. 23 और 24 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने एमएसपी के मुद्दों और निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है.

लखीमपुर खीरी हत्याकांड में सरकार और भारतीय जनता पार्टी ढुलमुल रवैया अपना रही है एसआईटी की रिपोर्ट में साजिश को स्वीकार किए जाने के बावजूद अजय मिश्रा टेनी केंद्रीय कैबिनेट में रहकर किसानों के जख्मों पर नमक डाल रहे हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस इस घटना में नामजद किसानों को फंसाने और गिरफ्तार करने में सक्रिय है. इसका विरोध करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा लखीमपुर खीरी में स्थायी मोर्चा की घोषणा करेगा.

'31 जनवरी को मनाया जाएगा वादाखिलाफी दिवस'

किसान नेताओं ने कहा कि 31 जनवरी को वादा खिलाफी दिवस मनाया जाएगा. 31 जनवरी सोमवार को पूरे देश में हर राज्य, जिले, तहसील, गांव में ट्रैक्टर रैली या धरना प्रदर्शन करेंगे. इसको लेकर तैयार कर ली गई है. सरकार तभी सुनेगी, जब हम रणनीति के साथ धरना प्रदर्शन करेंगे. किसान नेताओं ने कहा कि लखीमपुर खीरी मामले में SIT की रिपोर्ट के बाद टेनी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं हुआ है. किसान साथियों को मर्डर का मुलजिम बनाकर उनको जेल में डाल दिया गया.

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि वे 21 जनवरी को तीन दिन के दौरे पर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जाएंगे. किसान परिवारों से मिलेंगे. आंदोलन पर भी चर्चा होगी. रणनीति बनेगी. अगर बात नहीं बनी तो मोर्चा कायम रहेगा. इसके अलावा 23 और 24 फरवरी को भारत बंद का समर्थन करेंगे. जो संगठन विधानसभा चुनाव में शामिल हो गए हैं, वो संयुक्त मोर्चे के साथ नहीं रहेंगे. वो हिस्सा नहीं रहेंगे.

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