आप के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के टाइप 7 सरकारी बंगले के आवंटन को रद्द करने को चुनौती देने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिल गई है. राघव चड्ढा को फिलहाल बंगला खाली नहीं करना होगा. दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत के सरकारी बंगला खाली करने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है.
राहत के बाद राघव चड्ढा ने दिया बयान
हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद राघव चड्ढा का बयान आया है. उन्होंने कहा कि ये मकान या दुकान की नहीं, संविधान को बचाने की लड़ाई है. अंतत: सत्य और न्याय की जीत हुई है. मैं ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने के माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करता हूं, जो मेरे खिलाफ था.
राघव चड्ढा ने कहा कि इस आवंटन को रद्द करना राजनीतिक प्रतिशोध का स्पष्ट मामला था, जिसका उद्देश्य एक युवा, मुखर सांसद को चुप कराना था. मेरे आधिकारिक आवास को रद्द करने का निर्णय मनमाना, अनुचित और अन्यायपूर्ण था, जो राजनीतिक प्रतिशोध में एक नए निचले स्तर को दिखाता है.
इस घटना ने लोकतांत्रिक मानदंडों से एक अभूतपूर्व चीजें दिखाई, क्योंकि राज्यसभा के 70 साल के इतिहास में यह पहली बार था कि किसी सदस्य को सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए इस तरह के राजनीतिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. यह रद्दीकरण केवल दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रेरित था. इसमें घोर अनियमितताएँ थीं जो स्पष्ट रूप से स्थापित नियमों और विनियमों का उल्लंघन करती थीं. राज्य सभा सांसद ने कहा कि प्रत्येक संसद सदस्य आधिकारिक आवास का हकदार है, और जो मुझे दिया गया है वह मेरे साथी पहली बार के कई सांसदों को मिला है.
राज्यसभा सचिवालय के फैसले को निचली अदालत ने माना था सही
निचली अदालत में अंतिम फैसला आने तक रोक जारी रहेगी. पटियाला हाउस कोर्ट ने राघव चड्ढा को सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया था. निचली अदालत ने राज्यसभा सचिवालय के फैसले को सही माना था. दिल्ली हाईकोर्ट में आप नेता राघव चड्ढा ने सुरक्षा और आतंकी धमकियों का हवाला दिया था.
राघव के वकील ने कहा था कि पंजाब से उनको मिल रही धमकियों की वजह से z प्लस सुरक्षा मिली हुई है. राघव के वकील ने कहा कि मुझे पंजाब में सुरक्षा मिली हुई है. उसका यह मतलब कतई नहीं है कि दिल्ली में सुरक्षा घटा दी जाए. इस वजह से यहां मेरी हत्या कर दी जाए तो क्या होगा?
राघव चड्ढा ने कहा कि मुझे आशंका है कि मेरी शादी के समय ही जानबूझ कर मुझे परेशान करने की नीयत से ये सब बखेड़ा किया गया. राघव चड्ढा ने पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट से उनको फौरी राहत मिली है.
'जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा'
राघव चढ्ढा ने कहा कि विपक्षी आवाजें, जो लाखों भारतीयों की चिंताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. अब तक, मैंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को जवाबदेह ठहराते हुए संसद में दो भाषण दिए हैं. मेरे पहले भाषण के बाद, मेरा आधिकारिक आवास रद्द कर दिया गया. मेरे दूसरे भाषण के बाद, एक सांसद के रूप में मेरी सदस्यता निलंबित कर दी गई.
कोई भी सांसद तब तक काम नहीं कर सकता जब तक उसे यह चिंता न सताए कि उसके स्पष्ट और ईमानदार भाषण की उसे आगे क्या कीमत चुकानी पड़ेगी. हालाँकि, मैं डरता नहीं हूँ, और मैं लोकतंत्र के सिद्धांतों को बनाए रखने और इस सरकार को उसके कुकर्मों के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए कोई भी बलिदान देने के लिए तैयार हूँ.
'मुझे लाखों भारतीयों के दिलों से नहीं हटा सकते'
राघव ने कहा कि राज्यसभा से निलंबन के मुद्दे पर कल माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई की और राज्यसभा सचिवालय को नोटिस जारी कर मेरे निलंबन पर उनका जवाब मांगा. चूंकि मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है, इसलिए मैं उस संबंध में और कुछ नहीं बताना चाहता. मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि वे मुझे मेरे आधिकारिक आवास से हटा सकते हैं, वे मुझे संसद से हटा सकते हैं, लेकिन वे मुझे लाखों भारतीयों के दिलों से नहीं हटा सकते, जहां मुझे उम्मीद है कि मैं वास्तव में रहता हूं.