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'वेंटीलेटर' पर यमुना, बचाने के लिए प्रोफेशनल्स की अनोखी मुहिम

दिल्ली में यमुना नदी को साफ करने के लिए कुछ डॉक्टर, इंजीनियर, योग गुरु, कमांडेन्ट, कॉरपोरेट डायरेक्टर्स, डाइवर और शिक्षक पिछले पांच साल से लगातार अभियान चला रहे हैं. ये लोगों को यमुना में गंदगी नहीं डालने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं.

यमुना सफाई में जुटे युवा यमुना सफाई में जुटे युवा

दिल्ली सचिवालय के ठीक नीचे से गंदे नाले में तब्दील यमुना अब बह भी नहीं रही. गंदे पानी की सफेद झाग भी तैर रही है. डाइवर किनारे हैं और युवाओं की एक टीम फावड़े को लेकर नदी में उतर गई. कुछ युवा पॉलिथीन को नदी से निकाल रहे हैं.

उनकी टीम के दूसरे साथी कूड़े को टिपर वैन (कूड़ा उठाने की मशीन) में डाल रहे हैं. यह नजारा हर शनिवार दोपहर दो बजे देखने को मिल रहा है यानी हर शनिवार को ये युवा यमुना के घाट पहुंचते हैं और घंटों सफाई का काम करते हैं.

इन प्रोफेशनल्स युवाओं में डॉक्टर, इंजीनियर, योग गुरु, कमांडेन्ट, कॉरपोरेट डायरेक्टर्स, डाइवर, शिक्षक और कुछ आम लोगों के साथ बच्चे भी शामिल हैं. ये बच्चे यमुना वॉलंटियर और डस्टबीन अफसर हैं, जो युवाओं की यमुना के छठ घाट की सफाई टीम के जाने के बाद लोगों से गंदगी न फैलाने की अपील करते हैं और वहां होने वाली गंदगी के बारे में टीम को बताते हैं.

इनका एक ही मकसद 'गार्बेज फ्री यमुना' है और किसी भी हालत में पॉलिथीन यमुना में फेंकने से लोगों को रोकना है. पिछले पांच वर्षों से यमुना के संरक्षण और अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे एम्स के आर्थोपेडिक विभाग के युवा डॉ विवेक दीक्षित की अगुवाई में छठ घाट पर शनिवार दोपहर दो बजे सफाई की गई. स्वच्छ यमुना अभियान पिछले पांच वर्षों से दिल्ली प्रदेश के युवा वैज्ञानिकों व चिकित्सकों के साथ अन्य समाजसेवियों की जनभागीदारी से चल रहा स्वच्छता अभियान है.

इसका मुख्य उद्देश्य यमुना को कचरा मुक्त बनाना और जनजागरुकता फैलाना है. यह अभियान पिछले पांच वर्षों से छठ घाट आईटीओ ब्रिज पर प्रत्येक शनिवार को दोपहर दो बजे से चलाया जाता है. यह अभियान एक स्वैच्छिक अभियान है. यह न तो एनजीओ है और न ही कोई रजिस्टर्ड संस्था. इस अभियान का संपर्क सूत्र पेज स्वच्छ यमुना अभियान के नाम से फेसबुक पर उपलब्ध है.

इस अभियान को लेकर जब डॉक्टर विवेक दीक्षित से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, 'हमारा यह मानना है कि अगर हमारी पहल से दो लोग भी सफाई करने लगते हैं या फिर दूसरों को सफाई के लिए प्रेरित करते हैं, तो हमारी मुहिम सफल है. नदी का कोई धर्म नहीं होता है, उसे सिर्फ बहना होता है.'

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