पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार शुक्रवार को जवाहर लाल यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे. इस दौरान उनका पुराना तेवर दिखा. कैंपस में उन्होंने केंद्र सरकार और विवि प्रशासन के रवैए पर जमकर हमला बोला. साथ ही हाल में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) के सभी चार पदाधिकारियों व पूर्व यूनियन अध्यक्ष नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए निकालने के फैसले को गलत बताया.
इस दौरान पत्रकारों ने उनसे जेएनयू मामले में माफी को लेकर सवाल किया. इस पर उन्होंने कहा कि माफ़ी मांग लेंगे, तो सावरकर और भगत सिंह में क्या अंतर रह जाएगा. कन्हैया कुमार ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर गलत राजनीति करने का आरोप लगाया है और विवि प्रशासन से फैसला वापस लेने को कहा.
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कन्हैया कुमार विवि प्रशासन से की ये मांग
JNU प्रशासन ने छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष सहित मौजूदा सेंट्रल पैनल के चारों छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेट ( निकाल) कर दिया है. प्रशासन के इस आदेश के बाद से ही कैंपस में रस्टिकेट छात्रों के समर्थन में कई सारे टीचर्स और पूर्व के छात्र नेता उतर गए हैं. पूर्व छात्रों की तरफ से विवि प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है.
13 फ़रवरी को इसी कार्यक्रम के दौरान JNU के कई पूर्व अध्यक्ष और कई सारे प्रोफेसर यहां पहुंचे थे. इस कार्यक्रम के दौरान कन्हैया कुमार एक बार फिर पुराने अंदाज़ में नज़र आए. उन्होंने एक बार फिर न सिर्फ़ सरकार को घेरा, बल्कि प्रशासन से यह मांग की कि इन छात्रों के ख़िलाफ़ दिए गए आदेश को वापस लें. वरना छात्रों का यह आंदोलन और भी बड़ा होगा. इस आंदोलन में उनके जैसे सभी छात्र नेता और प्रोफेसर उनका साथ देंगे और प्रशासन को आदेश वापस लेने के लिए मजबूर करेंगे.
इन छात्रों को किया गया है रस्टिकेट
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) के सभी चार पदाधिकारियों और यूनियन के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेट कर दिया है. रस्टिकेट किए गए लोगों में JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और JNUSU के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं.
यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को “आउट ऑफ़ बाउंड्स” भी घोषित कर दिया है. तुरंत प्रभाव से उनके कैंपस में आने पर रोक लगा दी है. आपको बता दें कि यह डिसिप्लिनरी एक्शन पिछले साल नवंबर में हुई एक घटना की प्रॉक्टोरियल जांच के बाद लिया गया है. जब स्टूडेंट्स ने डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी समेत एकेडमिक जगहों पर फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) लगाने के खिलाफ प्रोटेस्ट किया था.
प्रदर्शनकारियों ने इस कदम को “मास सर्विलांस” कहा था और चेतावनी दी थी कि इससे कैंपस में प्राइवेसी, एकेडमिक फ्रीडम और डेमोक्रेटिक जुड़ाव को खतरा है.
(इनपुट- अमरदीप कुमार)