जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है. 5 जनवरी की रात कैंपस में आयोजित ‘गुरिल्ला ढाबा’ नामक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी की गई. इस मामले में अब जेएनयू प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर FIR दर्ज करने की मांग की है.
प्रशासन की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस नारेबाजी के जरिए न केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना की गई, बल्कि यह जेएनयू के कोड ऑफ कंडक्ट का भी स्पष्ट उल्लंघन है. विश्वविद्यालय ने इन घटनाओं को कैंपस की शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है. पत्र के साथ जेएनयू ने कुछ छात्रों के नाम भी दिल्ली पुलिस को सौंपे हैं, जिनमें जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष के. गोपिका का नाम भी शामिल है.
जेएनयू छात्र संघ उपाध्यक्ष ने आजतक से की बात
इस पूरे विवाद पर जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष के. गोपिका ने आजतक से फोन पर बातचीत की. उन्होंने कहा, "मैं वहीं पर थी. जो नारे लगे थे वो पितृसत्ता और एक विचारधारा के खिलाफ लगाए गए थे, जैसा कि हम जेएनयू में लगाते रहे हैं. मनोवाद की कब्र खुदेगी जैसे नारे भी हम लगाते हैं. किसी एक इंसान के खिलाफ हम नारे नहीं लगाते. हमारी लड़ाई एक विचारधारा के खिलाफ है और उसी तरह की नारेबाजी हम करते हैं. ये हमारा तरीका है यह दिखाने का कि हम पितृसत्ता, मनुवाद और ब्राह्मणवाद के खिलाफ हैं."
जब जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष को बताया गया कि वास्तव में क्या नारे लगे हैं तो उन्होंने कहा कि किसी को व्यक्तिगत तौर पर इसे नहीं लेना चाहिए. के. गोपिका ने आगे कहा, "मैं बार-बार कह रही हूं कि इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया जाना चाहिए. ये नारे एक विचारधारा के खिलाफ हैं. महिलाओं, अल्पसंख्यकों, वंचितों के खिलाफ खड़ी सत्ता के विरुद्ध ये नारे हैं. ये नारे इस विचारधारा के खिलाफ हमारे प्रतिरोध का प्रतिबिंब है. इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया जाना चाहिए."
क्या हुआ था 5 जनवरी की रात
दरअसल, 5 जनवरी की रात जेएनयू कैंपस में छात्रों का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसे 'A Night of Resistance with Guerrilla Dhaba' नाम दिया गया था. यह आयोजन 5 जनवरी 2020 को जेएनयू कैंपस में हुए नकाबपोश हमलावरों के हिंसक हमले की बरसी के मौके पर रखा गया था. जेएनयू छात्र संघ ने इसके लिए पोस्टर जारी कर छात्रों से रात 9 बजे साबरमती हॉस्टल के बाहर जुटने की अपील की थी.
शुरुआत में इस कार्यक्रम में करीब 30 से 35 छात्र शामिल हुए और कार्यक्रम का उद्देश्य केवल 2020 की हिंसा की बरसी को याद करना बताया गया. हालांकि जेएनयू प्रशासन का कहना है कि उसी दिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद कार्यक्रम का स्वर बदल गया और कुछ छात्रों ने कथित तौर पर आपत्तिजनक व उकसाने वाले नारे लगाए.
इन नारों का वीडियो सामने आने के बाद मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया. भारतीय जनता पार्टी ने इन नारों का वीडियो सार्वजनिक किया, जिसके बाद विवाद और गहरा गया. वीडियो में नारे किसी विचारधारा के बजाय सीधे तौर पर व्यक्तियों के खिलाफ नजर आ रहे हैं.