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ज्वेलर्स अब भी कैशलेस की बजाय कैश से लेनदेन पर दे रहे हैं ज़ोर

नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद दिल्ली के बड़े व्यापारी अब कैशलेस की बजाय कैश से लेनदेन को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. 'दिल्ली आज तक' की टीम ने चांदनी चौक के ज्वेलर्स बाजार का दौरा किया.

कैश से लेनदेन को ज्यादा तवज्जो कैश से लेनदेन को ज्यादा तवज्जो

नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद दिल्ली के बड़े व्यापारी अब कैशलेस की बजाय कैश से लेनदेन को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. 'दिल्ली आज तक' की टीम ने चांदनी चौक के ज्वेलर्स बाजार का दौरा किया.

चांदनी चौक में ज्वेलर विनीत सेठ जो 25 साल से ज्वेलरी बेच रहे हैं. उनके मुताबिक उनकी दुकान पर शादी के मौसम में बेहद भीड़ होती थी लेकिन अब दुकानदारी बेहद मंदी हो गई है. कैश की समस्या से बचने के लिए स्वाइप मशीन लगाई लेकिन ये मशीन अब उनके लिए परेशानी बन गई है.

विनीत ने बताया कि मशीन में सर्वर की प्रॉब्लम आती है. ऐसे में कस्टमर कार्ड देते हुए बहुत डरता है. कैश लेनदेन के लिए एक ज़रूरी हिस्सा है. मैं खुद क्रेडिट कार्ड या एटीएम इस्तेमाल नहीं करता. कैश लेनदेन के लिए सबसे अच्छा तरीका है. उन्होंने कहा कि हमें लोगों के घर जाकर भी बिजनेस करना पड़ता है और वहां हम मशीन लेकर नहीं जा सकते इसलिए कैश से ही पेमेंट लेते हैं.

चांदनी चौक में एक और ज्वेलर निर्मल कुमार जैन जो पिछले 45 साल से पुरानी दिल्ली में व्यवसाय कर रहे हैं. निर्मल जैन का मानना है कि उनके बिजनेस के लिए कैशलेस यूज़लेस है. एटीएम और कार्ड में इतनी सुविधा नहीं होती जो डेढ़ से दो लाख की ज्वेलरी खरीद सकें. कैश का लेनदेन हमेशा से ही अच्छी रहा है और आज भी अच्छा है.

निर्मल जैन का कहना है कि कैशलेस में समस्या ये है कि कोई ग्राहक चेक लेकर आता है तो हम बिना पहचान के चेक कैसे लें? चेक बाउंस हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा. कैशलेस चाय, पकौड़ी और रेस्टॉरेंट वालों के लिए ठीक है. ज्वेलरी का व्यापार कर रहे लोगों का मानना है कि नोटबंदी के बाद उनका बिजनेस पूरी तरह मंदा पड़ गया है. शादी के सीजन होने के बावजूद लोग ज्वेलरी बनवाने नहीं आ रहे हैं.

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