दिल्ली के जंतर-मंतर के पास भड़काऊ नारेबाजी केस में गिरफ्तार अश्विनी उपाध्याय को दिल्ली की अदालत ने बुधवार को जमानत दे दी. कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अश्विनी उपाध्याय बुधवार देर रात रिहा कर दिए गए हैं. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा है कि जो लोग वीडियो में नारेबाजी कर रहे हैं, उन्हें मैं नहीं जानता हूं.
अश्विनी उपाध्याय ने कहा, 'मैं उन लोगों को जनता हूं, जो उस वीडियो में नारे लगा रहे थे. मैं पहला व्यक्ति था, जिसने पुलिस को जानकारी दी थी. बावजूद इसके जिस तरह से मुझे फ्रेम किया गया वह दुखद है. मैं संविधान लागू करने की बात कर रहा हूं. मजहब के आधार पर जितने कानून हैं, सबको खत्म करने की मांग कर रहा हूं.'
अश्विनी उपाध्याय को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर बेल दी गई है. दरअसल जंतर-मंतर के पास 8 अगस्त को एक प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने भड़काऊ नारेबाजी की थी. नारेबाजी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए वकील अश्विनी उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया था. अश्विनी भी उस प्रदर्शन में मौजूद थे, जहां पर नारेबाजी की गई थी.
नारेबाजी मामले में कई लोग गिरफ्तार
जंतर-मंतर के पास हुए नारेबाजी के बाद अश्विनी उपाध्याय समेत विनोद शर्मा, दीपक सिंह, दीपक, विनीत क्रांति, प्रीत सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था. वहीं, पुलिस को अब भी पिंकी चौधरी की तलाश है. पुलिस ने इस संबंध में छापेमारी भी की है.
अश्विनी उपाध्याय लगातार कह रहे हैं कि वीडियो की सत्यता की जांच हो, अगर दोषी पाया जाए तो एक्शन लिया जाए. उन्होंने यह भी कहा था कि जंतर-मंतर पर आयोजित किए गए कार्यक्रम का आयोजक सेव इंडिया फाउंडेशन है, जिसके बारे में वह नहीं जानते हैं. वह सिर्फ प्रदर्शन में हिस्सा लेने ही गए थे.