scorecardresearch
 

जहांगीरपुरी दंगा मामला: दंगे से पहले बोरियों में रखी गई थी बोतलें, चार्जशीट में खुलासा

दिल्ली के जहांगीरपुरी में 16 अप्रैल को हनुमान जयंती के मौके पर कुछ लोग शोभायात्रा निकाल रहे थे. इस दौरान कुछ लोगों ने शोभायात्रा पर पथराव किया था. घटना के बाद जहांगीरपुरी में हिंसा भड़की थी. हिंसा में 8 पुलिसकर्मी समेत 9 लोग घायल हुए थे. पुलिस ने बताया था कि शोभायात्रा की अनुमति प्रशासन से नहीं ली गई थी.

X
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने मामले में 2063 पन्नों की चार्जशीट दायर की है. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने मामले में 2063 पन्नों की चार्जशीट दायर की है.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शोभायात्रा की नहीं मिली थी परमिशन
  • आरोपी बाबुद्दीन भीड़ को भड़काता नजर आया था

जहांगीरपुरी दंगा मामले में दिल्ली कोर्ट ने 31 मुस्लिम और 6 हिंदू समेत 37 आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया लिया है. चार्जशीट में पुलिस ने कहा कि जहांगीरपुरी में सांप्रदायिक झड़पें 2019-20 में शाहीन बाग और फरवरी 2020 में पूर्वोत्तर दिल्ली में सीएए और एनआरसी विरोधी विरोध प्रदर्शनों का विस्तार थीं, जो 16 अप्रैल को रामनवमी की घटना के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में और बढ़ गई थी. बता दें कि दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने मामले में 2063 पन्नों की चार्जशीट दायर की है. रोहिणी कोर्ट ने चार्जशीट पर विचार करने के लिए 28 जुलाई यानी कि आज की तारीख तय की थी.

चार्जशीट में कहा गया है कि जहांगीरपुरी में दंगों से पहले बोरियों में बोतलें रखी गईं थीं. दिल्ली पुलिस की जहांगीर पूरी केस में फ़ाइल चार्जशीट में लिखा है कि शुरुआत में यात्रा शांति से चल रही थी, जबतक वो सी ब्लॉक के मस्जिद के सामने नहीं पहुचीं. मस्जिद के सामने साजिश के तहत लोगों की भीड़ पहले से मौजूद थी. शोभायात्रा में शामिल लोगों से मस्जिद के बाहर मौजूद लोगों का आमना सामना हुआ. इसके बाद शोभायात्रा में मौजूद लोगों पर  खतरनाक हथियारों से वहां की भीड़ ने हमला कर दिया. शोभायात्रा में शामिल लोगों पर शीशे की बोतल और पत्थर भी फेंके गए. 

इसके बाद यात्रा में मौजूद लोगों ने भी विरोध किया और माहौल धीरे-धीरे दंगे में बदल गया. पुलिस के मुताबिक, जांच में पता लगा है कि हनुमान जयंती की शोभायात्रा में मौजूद कुछ लोगों ने भी तमंचा, तलवार और लाठी डंडे ले रखे थे. पुलिस ने इस मामले में 31 मुस्लिम और 6 हिंदुओं को गिरफ्तार किया है.

शोभायात्रा की नहीं मिली थी परमिशन

पुलिस के मुताबिक, शोभायात्रा को लेकर विश्व हिंदू परिषद के दिल्ली प्रान्त, मुखर्जी नगर और झंडेवालान के कुछ पदाधिकारियों ने जहांगीरपूरी एसएचओ से बात की थी. उन्होंने उत्तर पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी ऑफिस से संपर्क किया लेकिन शोभायात्रा की परमिशन नहीं मिली थी. लेकिन जब शोभायात्रा निकली तो एहतियात के तौर पर पुलिस ने सुरक्षा का पूरा इंतज़ाम किया. 

16 अप्रैल की शाम सवा चार बजे शोभायात्रा ईई ब्लॉक जहांगीरपुरी से शोभायात्रा निकली. शोभायात्रा की सुरक्षा में जहांगीरपुरी की लोकल पुलिस जुटी थी. इस टीम को इंस्पेक्टर इन्वेस्टिगेशन लीड कर रहे थे. उनके अलावा डीसीपी रिज़र्व के जवान भी वहां तैनात थे. शोभायात्रा शांति से चल रही थी, लेकिन जब शोभायात्रा शाम 6 बजे सी ब्लॉक के मस्जिद के सामने पहुचीं तो वहां अपने साथियों के साथ अंसार मौजूद था. अंसार ने शोभायात्रा में मौजूद लोगों से बहस शुरू कर दी. बहस पत्थरबाजी में बदल गई और देखते ही देखते दंगे का माहौल बन गया. 

कंट्रोल रूम को फोन कर बुलाई गई थी पुलिस

मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर राजीव ने चेतावनी देते हुए भीड़ से तुरंत हटने को कहा. इसके बाद कुछ लोग हटे लेकिन थोड़ी देर बाद वे फिर इकट्ठा हो गए, नारे लगाने लगे और थोड़ी देर बाद ही पत्थरबाजी शुरू हो गई. इसके बाद तुरंत कंट्रोल रूम को फोन करके पुलिस मौके पर बुलाई गई. चार्जशीट के मुताबिक, भीड़ के पास तमंचे, तलवार लाठी-डंडे तो थे ही, साथ मे पत्थरबाजी भी रही थी. 

इस दौरान आठ पुलिस वालों को भी चोट लगी. एक पुलिसकर्मी सब इंस्पेक्टर मेदा लाल के हाथ पर गोली लगी थी. दंगाई पत्थरबाजी कर रहे थे, गोली चला रहे थे, गाड़ियों में तोड़-फोड़ कर रहे थे, एक स्कूटी को भी आग के हवाले कर दिया. पुलिस ने इस मामले में शोभायात्रा बिना इजाजत निकालने के लिए उनके ऑर्गनाइज़र के ख़िलाफ भी केस किया. मौके से कुल 34 पीसीआर कॉल की गई थी.

बीसी ब्लॉक से शोभायात्रा गुजरने के बाद से हालत होने लगे थे खराब

पुलिस के मुताबिक, एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था. वायरल वीडियो में दिख रहा था कि जब शोभायात्रा बीसी ब्लॉक से गुजर रही थी तो उस वक़्त भी दो लोग शोभायात्रा में मौजूद लोगों को भला-बुरा कह रहे थे. हालात उस वक़्त से ही खराब होने लगा था, लेकिन माहौल 6 बजे उस वक़्त खराब हुआ जब शोभायात्रा सी ब्लॉक मस्जिद के सामने पहुंची. वहां पर अंसार, तबरेज, आलिम चिकना और इनके लोग मौजूद थे. भीड़ में कुछ ने पिस्टल, तलवार और डंडा ले रखा था. ये लोग शोभायात्रा में मौजूद लोगों से बहस करने लगे और हालात खराब होने लगे.

पथराव के बाद सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, शोभायात्रा में शामिल लोग जान बचाने के लिए कुशल चौक की तरफ भागने लगे. उन पर लगातार पत्थरबाजी और बोतलें फेंकी जा रही थी. इसके बाद कुशल चौक पर हिन्दू कम्युनिटी के लोग जुटने लगे और उन्होंने भी जवाब देना शुरू किया.

आरोपी बाबुद्दीन भीड़ को भड़काता नजर आया था

एक सीसीटीवी फुटेज में नजर आया कि इस हिंसा से पहले आरोपी बाबुद्दीन की दुकान के पास 8 से 10 बोरे में बोतलें भरकर रखी गई थी और बाद में यही बोतले दंगे में इस्तेमाल की गई. पुलिस के मुताबिक, आरोपी बाबुद्दीन भीड़ को भड़काता नज़र आया और उसने अपना चेहरा रुमाल से बांध रखा था और दंगाइयों के साथ कुशल चौक कि तरफ जा रहा था. इस बीच भीड़ की एक और टुकड़ी कुशल चौक की तरफ आई और उसने भी तोड़-फोड़ शुरू किया. तभी एच ब्लॉक कि तरफ से भीड़ आई और उसने इन्हें दौड़ा कर भगा दिया. कुशल चौक से सी ब्लॉक और सीडी ब्लॉक की तरफ मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या ज्यादा है, जबकि जी और एच ब्लॉक में हिन्दू कम्युनिस्ट के लोग ज्यादा रहते हैं.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें