आज 8 मार्च को देश-दुनिया में हर जगह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन इस दिन के अलावा अन्य दिन महिलाओं की स्थिति को सुधारने की कितनी कोशिश होती है, इसका इस बात से आकलन किया जा सकता है कि देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से चुने गए 7 सांसदों ने 2017-18 में चले संसद सत्र के दौरान महिलाओं की स्थिति और उनकी सुरक्षा से जुड़े एक भी सवाल नहीं पूछे.
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत पता लगा है कि दिल्ली के सातों सांसदों ने महिलाओं और बच्चों के अपराध से जुड़ा एक भी सवाल संसद में नहीं पूछा. मॉनसून सत्र 2017 से बजट 2018 के बीच चले सत्रों में महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर सांसदों के जरिए कोई सवाल नहीं उठाया गया. अवैध घुसपैठ, प्रिजन कस्टडी से संबंधित कोई सवाल नहीं पूछे थे. सांसदों ने इस दौरान कुल 23 सवाल पूछे थे जो साइबर क्राइम, एफआईआर, ह्यूमन रिसोर्स, पुलिस थाने के इंफ्रास्ट्रक्चर, अपराध के लिए पॉलिसी और नीतियों से संबंधित था.
हालांकि मॉनसून सत्र 2016 से 2017 के बजट सत्र तक कुल 23 सवाल पूछे गए थे, जिसमें महिलाओं से संबंधित 2 सवाल पूछे गए थे. इससे पहले मॉनसून सत्र 2014 से बजट सत्र 2015 तक चले सत्रों में सांसदों ने कुल 9 सवाल पूछे. मॉनसून सत्र 2015 से बजट सत्र 2016 में कुल 10 सवाल पूछे गए थे.
सवाल न पूछे जाने पर दिल्ली कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया ने कहा, इससे बीजेपी की मानसिकता का पता चलता है कि वो कितना कंसर्न रखती है. जबकि प्रधानमंत्री हर रैली में महिलाओं की सुरक्षा पर हंगामा करते हैं. आधी आबादी की सुरक्षा को लेकर जो वादे किए थे वो बीजेपी पूरा करे.
वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भी बीजेपी सांसदों पर हमला करते हुए कहा कि यह दिखाता है कि बीजेपी के लोग कितना कंसर्न है महिला सुरक्षा को लेकर.
प्रजा फाउंडेशन-हंसा रिसर्च के सर्वे में यह भी पता लगा है कि 40 प्रतिशत लोग दिल्ली में सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं. जबकि 50 प्रतिशत लोगों को लगता है कि दिल्ली महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित नहीं है. अपराध को देखने वाले 68 प्रतिशत जो पुलिस को सूचित करते हैं, पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं. जबकि 67 प्रतिशत जो अपराध का सामना करते हैं और पुलिस को सूचित करते हैं वो पुलिस की प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं.
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली में बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोत्तरी जारी है. 2017-18 में बलात्कार के 2,207 मामले दर्ज किए गए और यह वर्ष 2016-17 की तुलना में इसमें 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी पाई गई.