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ग्रीन पटाखे आखिर क्या हैं? एक्सपर्ट से लेकर खरीदार तक सब अंजान

पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से पटाखा विक्रेताओं और आम खरीदार दोनों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है.

रिएलटी चैक (फोटो-अंकित यादव-aajtak.in) रिएलटी चैक (फोटो-अंकित यादव-aajtak.in)

दिवाली के मद्देनजर पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक तरफ जहां लोगों में बैन हटने की खुशी है तो वहीं पर्यावरण अधिकारी भी इस मामले में संतोष जता रहे हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले में जिन कम प्रदूषण और कम आवाज़ वाले पटाखे यानी ग्रीन पटाखों का ज़िक्र है वो आख़िर क्या है? ये जानने के लिए दिल्ली आजतक की टीम गरुवार को दिल्ली के सभी बड़े पटाखा बाज़ारों में पहुंची. टीम ने दुकानदारों और खरीदारों दोनों से बात की.

दुकानदारों के पास अभी अस्थायी लाइसेंस नहीं

दिल्ली में आपको अगर अभी पटाखे ख़रीदने हैं तो केवल उन दुकानों से मिलेंगे जिनके पास परमानेंट यानी साल भर का पटाखे बेचने का लाइसेंस है. दरअसल, जो दुकानदार केवल दिवाली के मौके पर पटाखे बेचते हैं, उन्हें अस्थाई लाइसेंस दिया जाता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अभी लाइसेंस जारी नहीं किए गए हैं. दुकानदारों में इस बात को लेकर कन्फ़्यूजन है कि दिवाली इतने नज़दीक है लेकिन दिल्ली पुलिस ने अभी तक लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू नहीं की है.

ग्रीन पटाखों से अंजान लोग

दिल्ली आजतक के संवाददाताओं ने अलग-अलग बाज़ारों में जाकर खरीदारों और पटाखा विक्रेताओं दोनों से पूछा कि आख़िर ये कौन से पटाखे हैं, जिनमें कम प्रदूषण और कम आवाज़ होती है. हैरानी की बात यह कि दुकानदारों से लेकर खरीदारों तक किसी को भी इस पटाखों के बारे में नहीं पता. सदर बाज़ार पटाखा विक्रेता संघ के अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता ने कहा, यह पहली बार सुनने में आया है कि इस तरह के भी पटाखे होते हैं, जिनसे प्रदूषण या आवाज़ ना हो. सदर बाज़ार में पटाखों के प्रमुख विक्रेता हरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि जिस तरह से पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में बैन लगाया था इस साल भले ही राहत मिल गई हो लेकिन अभी तक हमें लाइसेंस जारी नहीं किए गए.

सदर बाज़ार ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव देवराज ने कहा कि पिछले साल सदर बाज़ार में 28 दुकानों को अस्थाई लाइसेंस जारी किए गए थे लेकिन इस बार अभी तक कोई जानकारी नहीं है. उन्हें इस बारे में नहीं पता कि किस तरह के पटाखे बेचने हैं. पर्यावरण एक्सपर्ट माई ब्रीथ दिल्ली की संस्थापक रवीना राज कौल से इस बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए. हालांकि एक्सपर्ट की मानें तो इन पटाखों में कैमिकल का कम से कम इस्तेमाल होगा.

करोड़ों के स्टॉक पर संकट

पटाखा विक्रेताओं का कहना है कि पिछले साल बैन होने से पहले जब उन्होंने करोड़ों रुपये के पटाखों का माल भर रखा था और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगा दिया था तो पिछले साल से अब तक उनका यह स्टॉक क्लियर नहीं हो पाया है. इस साल जब केवल कम प्रदूषण वाले पटाखे बेचने की अनुमति मिली है तो सबसे बड़ा संकट है कि करोड़ों रुपये के स्टॉक कहां जाएंगे?

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