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आंदोलन कर रहे किसानों को मिला स्कूली छात्राओं का समर्थन

कड़कती सर्दी में दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों के आंदोलन को अब आम आदमी का भी साथ मिलने लगा है. किसानों के आंदोलन को अब स्कूली छात्राओं का भी समर्थन मिला है.

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पोस्टर लेकर सिंघु बॉर्डर पहुंचीं छात्राएं
पोस्टर लेकर सिंघु बॉर्डर पहुंचीं छात्राएं
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पोस्टर लेकर दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पहुंचीं छात्राएं
  • छात्राओं की मांग- समस्याएं दूर करे सरकार
  • किसान आंदोलन से जुड़ रहा आम नागरिक भी

अन्नदाता किसान आंदोलित है. संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान बड़ी तादाद में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमा पर जमे हैं. कड़कती सर्दी में दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों के आंदोलन को अब आम आदमी का भी साथ मिलने लगा है. किसानों के आंदोलन को अब स्कूली छात्राओं का भी समर्थन मिला है.

भूख हड़ताल पर बैठे किसानों के समर्थन में सातवीं कक्षा की छात्राएं सिंघु बॉर्डर पहुंचीं. ये छात्राएं एक दिन पहले भी सिंघु बॉर्डर पहुंची थीं. दरअसल एक दिन पहले ये छात्राएं सिंघु बॉर्डर पर किसानों को देखने आई थीं, पर यहां पर किसानों का हाल देख कर इन्हें लगा कि उनकी मुहिम में अपना योगदान देना चाहिए. सिंघु बॉर्डर पर अब ये छात्राएं किसानों के समर्थन में पोस्टर लिए हुए नारे लगा रही हैं. यह पोस्टर प्रियांशी ने खुद अपने हाथ से बनाया है जिसमें इनके दादा और पिता की तस्वीर है.

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प्रियांशी बताती हैं कि उनके पापा नौकरी करते हैं. वे दादू के साथ हैं. गांव में खेत है. उन्होंने बताया कि इस पोस्टर को मैंने खुद बनाया है, क्योंकि किसानों की भी पहचान है. वह देश के अन्नदाता हैं. प्रियांशी ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार किसानों की समस्या दूर करें. वहीं, एक अन्य छात्रा शालू कहती हैं कि हम जब यहां पर आए तो देखा कि किसान भूखे-प्यासे ट्रक के नीचे, ट्रैक्टर के नीचे ठंड में सो रहे हैं.

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शालू बताती हैं कि यह हमसे देखा नहीं गया. हमें लगा कि उनका साथ देने के लिए यहां आज फिर से आना चाहिए. गौरतलब है कि दिल्ली की कड़ाके की सर्दी में आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में अब देश की राजधानी का आम नागरिक भी जुड़ रहा है. अलग-अलग प्रोफेशन के लोग यहां पहुंचकर अपने अंदाज में किसानों का समर्थन कर रहे हैं.

 

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