दिल्ली के द्वारका में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 23 वर्षीय मोटरसाइकिल सवार साहिल धनैशरा की मौत के मामले में नया CCTV फुटेज सामने आया है. इस वीडियो में हादसे से कुछ सेकंड पहले एक स्कॉर्पियो SUV तेज रफ्तार में दौड़ती दिखाई दे रही है. यह फुटेज ऐसे समय सामने आया है जब मामले में यह बहस तेज है कि नाबालिग आरोपी पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाए या नहीं.
यह हादसा द्वारका इलाके में हुआ, जहां तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने पहले सामने से आ रही मोटरसाइकिल को टक्कर मारी और फिर सड़क किनारे खड़ी टैक्सी में जा घुसी. हादसे में साहिल धनैशरा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि टैक्सी चालक घायल हो गया.
CCTV फुटेज में हादसे से पहले तेज रफ्तार स्कॉर्पियो
दिल्ली पुलिस के अनुसार, उन्हें पीसीआर कॉल के जरिए सूचना मिली थी कि लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के पास एक घातक सड़क दुर्घटना हुई है. पुलिस ने बताया कि जब टीम मौके पर पहुंची तो वहां एक टैक्सी, एक मोटरसाइकिल और स्कॉर्पियो SUV दुर्घटनाग्रस्त हालत में मिलीं. मोटरसाइकिल चालक की पहचान साहिल धनैशरा, उम्र 23 वर्ष, के रूप में हुई, जिसकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी.
पुलिस ने बताया कि स्कॉर्पियो ने पहले विपरीत दिशा से आ रही मोटरसाइकिल को टक्कर मारी और इसके बाद सड़क किनारे खड़ी टैक्सी में टकरा गई. टैक्सी चालक अजित सिंह को घायल अवस्था में आईजीआई अस्पताल भेजा गया. पुलिस ने उनका बयान दर्ज कर लिया है और अंतिम मेडिकल राय का इंतजार किया जा रहा है.
आरोपी ड्राइवर 17 साल का नाबालिग, बिना लाइसेंस चला रहा था SUV
जांच के दौरान पुलिस ने इस हादसे में शामिल सभी वाहनों को जब्त कर लिया है और उनकी मैकेनिकल जांच कराई गई है. साथ ही इलाके के CCTV फुटेज भी जुटाए गए हैं. इसी क्रम में अब एक नया CCTV क्लिप सामने आया है, जिसे आजतक के पास आया है. इसमें हादसे से कुछ सेकंड पहले स्कॉर्पियो SUV तेज रफ्तार से सड़क पर चलती नजर आ रही है.
इस मामले में आरोपी ड्राइवर की पहचान अक्षत्रा सिंह के रूप में हुई है. पुलिस ने पुष्टि की है कि आरोपी के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और उसकी उम्र 17 साल है. आरोपी नाबालिग होने के कारण उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया और उसे ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया.
उम्र को लेकर शुरुआती भ्रम, मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड पहुंचा
हालांकि शुरुआती चरण में आरोपी की उम्र को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में एफआईआर में उम्र 19 साल लिखी गई थी क्योंकि जांचकर्ता यह संभावना देख रहे थे कि आरोपी पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है. बाद में बचाव पक्ष के वकील द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी नाबालिग है.
नाबालिग होने के चलते उसे अंतरिम जमानत भी दी गई है. यह जमानत इस आधार पर मिली कि आरोपी को 10 फरवरी से शुरू हो रही कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होना है. पुलिस ने आरोपी के पिता को भी हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया. पुलिस ने बताया कि आरोपी के पिता का नाम मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चार्जशीट में शामिल किया जाएगा.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सड़क हादसे से मौत की पुष्टि
द्वारका के डीसीपी अंकित कुमार सिंह ने पहले कहा था कि हादसे के वक्त किसी भी तरह के स्टंट किए जाने का कोई सबूत नहीं मिला है. यह बयान उन आरोपों के बाद आया था जिनमें कहा गया था कि हादसे के समय वाहन से स्टंट या रील बनाई जा रही थी. इस बीच साहिल धनैशरा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आई है.
रिपोर्ट के अनुसार, मौत का कारण क्रैनियो सेरेब्रल इंजरी, दाहिने हाथ में गंभीर चोट और महत्वपूर्ण अंगों में चोट के कारण हुए अत्यधिक रक्तस्राव से शॉक बताया गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चोटों की प्रकृति सड़क दुर्घटना के प्रभाव से मेल खाती है.
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही मृतक के दोस्तों और परिजनों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है. साहिल के करीबी दोस्त मानव सचदेवा ने आरोपी के लिए सख्त सजा की मांग की है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में साहिल जैसा मेहनती इंसान नहीं देखा.
दोस्त और परिवार की मांग, आरोपी को मिले सख्त सजा और जवाबदेही
मानव ने बताया कि साहिल अपने परिवार के लिए बहुत मेहनत करता था और विदेश जाने की योजना पर भी विचार कर रहा था. उन्होंने कहा कि साहिल की मां से उन्हें संकेत मिला था कि परिवार उसे मैनचेस्टर या जर्मनी भेजने की सोच रहा था.
मानव सचदेवा ने कहा कि उनकी मांग है कि आरोपी को जेल की सजा मिले और उसे अपने किए का एहसास हो. उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी के पिता को भी यह याद रखना चाहिए कि उन्होंने अपने बेटे को बिना लाइसेंस कार चलाने के लिए कैसे भेज दिया.
पुलिस मामले की गहराई से जांच में जुटी
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है. CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और तकनीकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है. यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकने के लिए जिम्मेदारी किसकी है और सड़क सुरक्षा के नियमों को कितनी सख्ती से लागू किया जाना चाहिए. जांच जारी है और पुलिस ने कहा है कि सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.