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संसद की तरफ बढ़ रही हैं स्वाति मालीवाल, निर्भया के दोषियों को जल्द फांसी देने की मांग

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल निर्भया के दोषियों को जल्द फांसी पर लटकाने की मांग को लेकर 10वें दिन अनशन पर हैं. गुरुवार को मालीवाल की अगुआई में एक जत्था राजघाट से संसद की तरफ कूच कर रहा था जिसे रोक लिया गया है.

स्वाति मालीवाल (फाइल फोटो- पीटीआई) स्वाति मालीवाल (फाइल फोटो- पीटीआई)

  • निर्भया के दोषियों को जल्द फांसी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन
  • स्वाति मालीवाल की अगुआई में संसद की तरफ रवाना हुए प्रदर्शनकारी

निर्भया केस के चारों दोषियों की दया याचिक पर अभी भी राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार है. वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की अगुआई में एक जत्था राजघाट से संसद की तरफ कूच कर रहा है.

फिलहाल राजघाट से निकले प्रदर्शनकारियों को शहीदी पार्क के पास बेरिकेड्स लगा कर रोका गया है. इसके साथ ही कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पीटा भी है.

सभी दोषियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाने की मांग को लेकर स्वाति मालीवाल लगातार 10वें दिन प्रदर्शन कर रही हैं. इससे पहले वो आमरण अनशन पर थीं.

हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हैवानियत करने के आरोपियों की पुलिस एनकाउंटर में खात्‍मे के बाद शुक्रवार को स्वाति मालीवाल ने अनशन खत्म कर दिया था. लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि निर्भया के दोषी अभी भी सरकारी मेहमान हैं. दोषियों को जल्दी सजा मिलनी चाहिए.

अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

बता दें कि निर्भया के चारों दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है. अक्षय को ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी. दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी सजा को बरकरार रखा था. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में 17 दिसंबर दोपहर 2 बजे के करीब सुनवाई की जाएगी.

इससे पहले 9 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप मामले में तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी. चौथे आरोपी अक्षय ने तब तक पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की थी.

कोर्ट का मानना था कि तीनों दोषियों के केस पर पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं है. याचिका में कोई मेरिट नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने विनय, मुकेश और पवन की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाया था. इससे पहले अदालत ने 4 मई 2018 को सुनवाई खत्म कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 5 मई 2017 को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा था.

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