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दिल्ली हिंसा: पुलिस की भूमिका पर सवाल, प्रशांत भूषण ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी

प्रशांत भूषण ने कहा कि आज दिल्ली पुलिस हिंसा की जांच नहीं कर रही है, बल्कि लोगों को फंसा रही है. संविधान में युवा बच्चों को विरोध प्रदर्शन का हक दिया गया है, लेकिन अब पुलिस का कहना है कि जो लोग सिखा रहे थे, वे भावनाओं को भड़का रहे थे.

प्रशांत भूषण (फाइल फोटो-PTI) प्रशांत भूषण (फाइल फोटो-PTI)


दिल्ली हिंसा को लेकर पुलिसिया जांच और चार्जशीट पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं. आज बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली की निंदा की गई. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, सईदा हामिद और कविता कृष्णन ने संबोधित किया. तीनों ने दिल्ली पुलिस पर लोगों को फंसाने का आरोप लगाया.

सईदा हामिद ने कहा कि मैं जामिया में रहती हूं. मैंने देखा कि दिसंबर में जामिया में क्या हुआ था. जो लोग संविधान की बात करते हैं, तो उन्हें इसके लिए दंडित किया जाता है. उन लोगों की क्या गलती थी जो अपने दोस्तों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे थे? हमने सोचा कि सड़कों पर आने से चीजें बदल जाएंगी, लेकिन बिना गलती उन पर इल्जाम लगाए गए.

वहीं, प्रशांत भूषण ने कहा कि आज दिल्ली पुलिस हिंसा की जांच नहीं कर रही है, बल्कि लोगों को फंसा रही है. संविधान में युवा बच्चों को विरोध प्रदर्शन का हक दिया गया है, लेकिन अब पुलिस का कहना है कि जो लोग सिखा रहे थे, वे भावनाओं को भड़का रहे थे.  दिल्ली पुलिस का कहना है कि लोगों को भड़काने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया थाय

प्रशांत भूषण ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दायर कर कहा है कि ट्रम्प की यात्रा के दौरान भारत को बदनाम करने के लिए हिंसा हुए थे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दूसरों को लिखा कि हिंदुओं से सवाल मत पूछिए क्योंकि यह हिंदुओं को नुकसान पहुंचा रहा है, यह कैसे संभव है. दिल्ली पुलिस ने लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी.

प्रशांत भूषण ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल नागरिकों को फंसाने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा एक आपराधिक साजिश रची जा रही है. हमने राष्ट्रपति को पत्र लिखा कि दिल्ली पुलिस की जांच के लिए एक समिति गठित किया जाए.

वहीं, कविता कृष्णन ने कहा कि छात्रों के लिए 40 जीबी, 11 लाख पेज पुलिस के पास है, लेकिन सरकार को प्रवासी मजदूरों की जानकारी नहीं है. इससे पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं.

 

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