दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट इलाके में हुई हिंसा के बाद अब हालात सामान्य हैं. हालांकि, लोग अभी भी डरे हैं. इस बीच हिंसा के प्रभावित लोगों की मदद का सिलसिला शुरू हो गया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों को तुरंत मदद देने के लिए एक हैशटैग की शुरुआत की है. अगर कोई भी तत्काल मदद चाहता है तो उसे #DelhiRelief के साथ अपनी समस्या को ट्वीट करना होगा.
सोमवार को सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हिंसा का शिकार सभी लोगों को राहत पहुंचाने के लिए हम 24x7 काम कर रहे हैं. अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जिसे हमारी जरूरत है तो आप #DelhiRelief के साथ उसकी जानकारी हमसे शेयर कर सकते हैं. ट्वीट के साथ सटीक पता और उससे जुड़ी जानकारी हो, ताकि हम उस व्यक्ति तक पहुंचे सके. हमारी एजेंसियां तुरंत कार्रवाई करेगी.
We are working 24/7 to make sure relief efforts reach all in need. If u know of anyone who is in need, use #DelhiRelief to reach us. Pl do mention exact address/contact details so that we can reach him. We will ensure a quick response from our agencies.
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) March 2, 2020
मुआवजे का हुआ था ऐलान
इससे पहले दिल्ली सरकार ने हिंसा के शिकार हुए लोगों के लिए मुआवजे का ऐलान किया था. सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मारे गए लोगों को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी. इस 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि में से एक लाख रुपया एक्स ग्रेशिया के तहत तुरंत मुहैया कराया जाएगा, जबकि 9 लाख रुपये दस्तावेजों की पुष्टि होने के बाद मृतक के परिजनों को दिए जाएंगे. वहीं हिंसा में मारे गए बच्चों के परिजनों को दिल्ली सरकार 5 लाख का मुआवजा देगी.
Delhi: Death toll rises to 46 now; (38 at Guru Teg Bahadur Hospital, 3 at Lok Nayak Hospital, 1 at Jag Parvesh Chander Hospital & 4 at Dr. Ram Manohar Lohia Hospital) in North East Delhi violence. pic.twitter.com/XWvboAduLM
— ANI (@ANI) March 2, 2020
अब तक 46 की मौत
दिल्ली हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा 46 हो गया है. गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल में 38, लोक नायक हॉस्पिटल में 3, जग परवेश चंदर हॉस्पिटल में एक और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में चार लोगों की मौत हुई है. कई अस्पतालों में अभी भी जख्मी लोगों का इलाज चल रहा है. हिंसा के करीब एक हफ्ते बाद प्रभावित इलाकों में हालात सुधर रहे हैं, लेकिन जली दुकानें- जले घर आज भी डराते हैं.