राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में मस्जिद के पास कुछ अवैध निर्माणों पर बुलडोजर एक्शन हुआ है. इस दौरान, स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले भी दागे गए. इस मामले में अब समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम भी सामने आया है. जानकारी के मुताबिक, एसपी सांसद बुलडोजर एक्शन के वक्त मौके पर पहुंचे थे और पुलिस के साथ उनकी बहस भी हुई.
अवैध निर्माण गिराने के दौरान मोहिबुल्लाह और पुलिस के बीच बहस हुई. सोशल मीडिया के जरिए एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मोहिबुल्लाह नदवी उसमें नजर आ रहे हैं. संबंधित वीडियो रात करीब डेढ़ बजे का बताया जा रहा है.
दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ बहस हुई और बैरिकेड के पास एसपी सांसद को पुलिस ने रोका. वे बैरिकेड को क्रॉस करके बुलडोजर एक्शन वाली जगह जाना चाह रहे थे.
'बुलडोजर कार्रवाई टाली जा सकती थी...'
समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने आजतक से बातचीत में कहा, "हम लोगों से अपील करने गए थे कि कोई नाखुशगवार वाकया ना पेशा आए. एक ऐसे वक्त में बुलडोजर कार्रवाई की गई, जब सर्दी की रातें हो रही हैं और प्रशासन अपने शहरियों के लिए रैन बसेरे का इंतजाम कर रहा है. तो आखिर रात में इस तरह कार्रवाई की क्या जरूरत थी. इसको टाला भी जा सकता था. एमसीडी के पास भी अभी वक्त था."
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बुलडोजर कार्रवाई के दौरान पहुंचने के सवाल पर सांसद नदवी ने जवाब देते हुए कहा, "मैं मौके पर इसलिए पहुंचा, जिससे लोग उग्र न हों. लोगों को भरोसे में तो लेना चाहिए. इस चीज का हलफ मैंने भी लिया है और प्रशासन ने भी लिया है कि सच्ची श्रृद्धा के साथ काम करना है. ये नहीं कि भेदभाव करके रातों-रात ऐसी कार्रवाई की जाए और लोग सड़कों पर आ जाएं."
उन्होंने आगे कहा कि तीन महीने प्रोवीजन था,मामला कोर्ट में लंबित है,इस कार्रवाई को 12 फरवरी तक टाला जा सकता था. अगर सही तरीके से किया जाता, तो कुछ नहीं होता. अगर मस्जिद होती है, तो प्रशासन को रात में भी एक्शन करना जरूरी हो जाता है. अगर मुसलमानों का मामला होता है, तो कार्रवाई जरूरी हो जाती है.
'धार्मिक स्थल को नहीं छुआ गया...'
दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इकबाल ने डेमोलिशन ड्राइव पर बयान जारी करते हुए कहा, "निगम ने केवल अवैध निर्माण को हटाया है. 1940 में एलएनडीओ (L&DO) द्वारा कब्रिस्तान को करीब 900 स्क्वायर मीटर जमीन दी गई थी, जहां बाद में मस्जिद बनी. विवाद मस्जिद के बगल में रामलीला ग्राउंड के अंदर किए गए बहुत बड़े अवैध निर्माण को लेकर था, जिसमें एक बैंक्वेट हॉल और अन्य सुविधाएं चल रही थीं."
उन्होंने आगे कहा कि माननीय हाई कोर्ट ने मैनेजमेंट कमेटी के दस्तावेजों को देखने के बाद अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया था. मेयर के मुताबिक, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने केवल कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बैंक्वेट हॉल को ढहाया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल को छुआ तक नहीं गया है और केवल अफवाहें फैलाई गईं. आधी रात को की गई कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि मुद्दा केवल अवैध निर्माण हटाना था, समय मायने नहीं रखता.
मेयर राजा इकबाल ने कहा, "रामलीला मैदान को अतिक्रमण मुक्त कराने का मामला हाई कोर्ट में था, जहां मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी ने भी अपना पक्ष रखा था. कोर्ट ने सभी कानूनी पहलुओं को देखने के बाद ही अवैध निर्माण हटाने का फैसला सुनाया. नोटिस के सवाल पर उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश खुद में एक कानूनी प्रक्रिया है और निगम ने इसकी सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही बुलडोजर चलाया है."