
दिल्ली के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में तीन दिवसीय ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला. जहां आम दिनों में रोजाना 4 से 5 हजार ट्रकों की आवाजाही होती है, वहीं आज सड़कों पर ट्रक खड़े नजर आए.
कई ट्रकों में भरा माल वहीं अटका हुआ है और ट्रक ड्राइवर सड़कों पर बैठे इंतजार करते दिखे.कश्मीर से हर दो दिन में सामान लेकर आने वाले एक ट्रक ड्राइवर ने बताया कि नए टैक्स के चलते उनके काम पर सीधा असर पड़ा है. उन्होंने कहा, 'जरूरत का सामान ट्रांसपोर्ट नगर में ही खड़ा है, पता नहीं कब तक खड़ा रहेगा.'
बता दें कि गुरुवार शाम प्रदर्शनकारियों और व्यापारियों ने मिलकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. बैलगाड़ियों के साथ सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की गई और सरकार से मांगें पूरी करने की अपील की गई.
चक्का जाम के कारण ट्रक मंडी तक नहीं पहुंच पा रहा स्टॉक
एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी आजादपुर मंडी में भी हड़ताल का असर साफ दिखाई दे रहा है. टमाटर कारोबारी महावीर चौहान के मुताबिक, 'रोजाना 5 से 6 ट्रक टमाटर बिकते हैं, लेकिन चक्का जाम के कारण ट्रक मंडी तक नहीं पहुंच पा रहे. जो स्टॉक मौजूद है, उसकी सप्लाई भी छोटे ट्रकों के न चलने से प्रभावित हो रही है.'

वहीं खारी बावली और नया बाजार अनाज मंडी में भी असर दिखना शुरू हो गया है।.दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष गौरव गुप्ता का कहना है कि उनका चावल का व्यापार मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब से आता है. लेकिन हड़ताल जारी रहने पर सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसका प्रभाव आने वाले दिनों में आम जनता तक पहुंचने का खतरा है.
गांधीनगर मार्केट का क्या है हाल?
हालांकि एशिया की सबसे बड़ी होलसेल कपड़ा मार्केट गांधीनगर में फिलहाल असर कम नजर आ रहा है. मार्केट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नरेश सिक्का के मुताबिक, 'पिछले 15 दिनों से मार्केट में काम कम है, इसलिए हड़ताल का ज्यादा असर नहीं दिख रहा. अगर काम होता, तो स्थिति अलग होती.'

उन्होंने ये भी बताया कि छोटे ट्रांसपोर्टर अभी भी बुकिंग ले रहे हैं क्योंकि उनके वेयरहाउस दिल्ली बॉर्डर के बाहर हैं. हालांकि सप्लाई में देरी की संभावना बनी हुई है.
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कुल मिलाकर, ट्रांसपोर्टरों की ये हड़ताल अब धीरे-धीरे दिल्ली की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा रही है. अगर हड़ताल लंबी खिंचती है, तो इसका सीधा असर बाजार और आम लोगों की जरूरतों पर पड़ सकता है.