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दिल्ली हिंसा: हेड कान्स्टेबल हत्या केस के चार में से दो आरोपियों को HC ने दी जमानत

दिल्ली हिंसा में हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या और DCP के घायल होने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने चार में से दो आरोपियों को जमानत दे दी है. जबकि दो अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार किया है.

दिल्ली हाईकोर्ट. (फाइल फोटो) दिल्ली हाईकोर्ट. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दो आरोपियों को दिल्ली हाईकोर्ट ने दी जमानत
  • दो अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार
  • पिछले साल हिंसा के दौरान गई थी पुलिसकर्मी रतन लाल की जान

दिल्ली हिंसा में हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या और DCP के घायल होने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने चार में से दो आरोपियों को जमानत दे दी है. जबकि दो अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार किया है. इस मामले में कोर्ट ने जिन दो आरोपियों को जमानत दी है, उनके नाम शहनवाज और मोहम्मद अय्यूब हैं. वहीं कोर्ट ने साकिब और इरशाद को ज़मानत देने से इनकार किया है.

बता दें कि पिछले साल सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के चांदबाग इलाके में हेड कान्स्टेबल रतन लाल पर दंगाइयों ने हमला कर दिया था. बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. हिंसा के दौरान आईपीएस अधिकारी अमित शर्मा भी बुरी तरह घायल हो गए थे.

इससे पहले राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्व इलाके में पिछले साल हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में दिल्ली की सेशंस कोर्ट ने एक आरोपी को गंभीर आरोपों से मुक्त किया था. अदालत ने कहा था कि हिंसा से जुड़े मामलों में कॉमन सेंस का इस्तेमाल करनी भी ज़रूरी है. सेशंस कोर्ट के जज विनोद यादव ने अपने एक आदेश में कहा कि हिंसा से जुड़े मामलों में गंभीरता से काम करना जरूरी होता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि कॉमन सेंस का इस्तेमाल ना किया जाए.

बीते अगस्त के महीने में एडिशनल सेशन जज विनोद यादव ने सुनवाई के दौरान कहा था कि नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में साल 2020 की हिंसा के मामले में जांच का स्तर बहुत खराब है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर से जरूरी कदम उठाने के लिए भी कहा. जज विनोद यादव ने यह टिप्पणी 25 फरवरी को पुलिसकर्मियों पर एसिड, शीशे की बोतल और ईंट से हमले के मामले में आरोप तय करते हुए की.

इसपर भी क्लिक करें- दिल्ली दंगों की जांच में फिर घिरी पुलिस, सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणी- जांच का स्तर बहुत खराब

गौरतलब है कि साल 2020 में नई दिल्ली में नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच हिंसा भड़क गई थी. करीब तीन दिनों तक दिल्ली में बवाल हुआ था और 50 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, सैकड़ों लोग इस दौरान घायल हुए थे.

 

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