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दिल्ली के 7 वॉलंटियर्स की मुहिम, प्लाज्मा डोनर की बनाई वेबसाइट, बचाई 1500 जिंदगियां

दिल्ली में 7 लोगों की वॉलंटियर्स की एक टीम ने प्लाज्मा डोनर्स को मरीजों के साथ कनेक्ट करवाने की जिम्मेदारी उठायी है, और अब तक लगभग 1500 से अधिक डोनर्स को मरीजों के परिजनों से संपर्क करवा चुकी है.

बसाइट के माध्यम से प्लाज्मा देने पहुंचे राजेश शर्मा बसाइट के माध्यम से प्लाज्मा देने पहुंचे राजेश शर्मा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिव्या जैन की अगुवाई में मुहिम चला रही है टीम
  • अब तक 1500 प्लाज्मा डोनर से कराई मदद

देश अब तक की सबसे बड़ी महामारी से जूझ रहा है, कोविड के मरीज और उनके परिजन केवल बीमारी और संक्रमण से ही नहीं जंग लड़ रहे हैं, बल्कि उन्हें दवाई, अस्पताल, बेड, ऑक्सीजन, और प्लाज्मा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. इन सबमें एक बड़ा संघर्ष है प्लाज्मा का, क्योंकि कोरोना से जंग जीत चुके लोग भी डर के चलते प्लाज्मा डोनेट करने से कतराते हैं, और जो देने को तैयार होते हैं उन्हें ये नहीं पता होता कि क्या प्रक्रिया है.

ऐसे में देश के तमाम सामाजिक संगठनों, समाज सेवकों, कई राजनीतिज्ञों और कई कार्यकर्ताओं ने अपने स्तर पर लोगों का जीवन बचाने के लिए सहयोग करने की मुहिम छेड़ी है. इसी मुहिम में दिल्ली में 7 लोगों की वॉलंटियर्स की एक टीम ने प्लाज्मा डोनर्स को मरीजों के साथ कनेक्ट करवाने की जिम्मेदारी उठायी है, और अब तक ये टीम लगभग 1500 से अधिक डोनर्स को मरीजों के परिजनों से संपर्क करवा चुकी है.

टीम को लीड करने वाली दिव्या जैन बताती हैं कि उनकी टीम अपनी वेबसाइट https://fightagainstcovid19.org/plasma-donation/  के जरिए पिछले 3 महीनों में कोरोना से जंग जीतने वाले लोगों को इस वेबसाइट पर रजिस्टर करवाते हैं. जैसे ही डोनर प्लाज्मा डोनेट करने को तैयार होता है, ये टीम जरूरतमंदो के साथ उसे कनेक्ट करवा देती है. प्रयास किया जाता है कि डोनर को उसके निकटतम अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों से संपर्क करवाया जाए और एक जिंदगी बचाने में मदद की जाए.

एक प्रतिष्ठित MNC में डाटा मैनेजर के तौर पर काम कर चुकीं दिव्या, पिछले लंबे समय से राजनैतिक कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय रही हैं. वे बताती हैं कि इस मुहिम में सबसे कठिन काम होता है लोगों को प्लाज्मा डोनेट करने के लिए तैयार करना क्योंकि उनमें इस महामारी में अस्पताल जाने को लेकर एक डर सा होता है.

7 लोगों की इस टीम में दिव्या के अलावा सविता बिष्ट, रिकित शाही, हिमांशु पंडित, आयुषी सक्सेना, अमित पुंडीर और पद्मिनी हैं, जो कि आर्किटेक्ट, वेब डेवलेपर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स, और फ्री लांसर के तौर पर लेखन का काम करते हैं. दिव्या का कहना है कि हर सदस्य इस बात को सुनिश्चित करता है कि हर परिस्थिति में डोनर्स की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाए और उनकी जानकारी केवल उन लोगों से साझा की जाए जिन्हें प्लाज्मा की जरूरत है.

इस टीम जैसी कई टीमें लोगों की जिंदगी बचाने में जुटी हैं, आप भी यदि कोरोना से ठीक हुए हैं तो अपना प्लाज्मा जरूर डोनेट करें, आपका ये योगदान किसी का जीवन बचा सकता है और परिवारों की खुशी का कारण बन सकता है.

 

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