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दिल्ली: सैलरी और बोनस के लिए कभी भी हड़ताल पर जा सकते हैं MCD कर्मचारी

दिल्ली में एमसीडी कर्मचारियों ने हड़ताल की धमकी दी है. सफाई कर्मचारी, डीएमसी कर्मी, पेंशनर्स और निगम के शिक्षकों को बकाया सैलरी नहीं मिली है. हालत यह है कि उत्तरी निगम के 52 हजार कर्मचारियों का भारत सरकार द्वारा एक जनवरी 2020 से रोका हुआ डीए (महंगाई भत्ता) और एचआरए अभी तक बहाल नहीं किया है.

दिल्ली नगर निगम दिल्ली नगर निगम
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में एमसीडी कर्मचारियों ने हड़ताल की धमकी दी
  • महंगाई भत्ता और एचआरए अभी तक बहाल नहीं

दिल्ली में एमसीडी कर्मचारियों ने हड़ताल की धमकी दी है. सफाई कर्मचारी, डीएमसी कर्मी, पेंशनर्स और निगम के शिक्षकों को बकाया सैलरी नहीं मिली है. हालत यह है कि उत्तरी निगम के 52 हजार कर्मचारियों का भारत सरकार द्वारा एक जनवरी 2020 से रोका हुआ डीए (महंगाई भत्ता) और एचआरए अभी तक बहाल नहीं किया है. बढ़ा हुआ डीए 11 फीसदी और HRA तीन फीसदी एक जुलाई 2021 से लागू करना था, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका.

शिक्षक न्याय मंच नगर निगम संगठन के अध्यक्ष कुलदीप सिंह खत्री ने बताया के अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उत्तरी निगम के 7000 से ज्यादा शिक्षक 26 अक्टूबर को सिविक सेंटर गेट नम्बर तीन पर धरने प्रदर्शन पर उतर रहे हैं. शिक्षकों की अनेक मांगें लंबित पड़ी हुई हैं जो अब तक पूरी नही की गई हैं. 10 साल के MACP एरियर्स बकाया है, सातवें पे कमीशन के एरियर्स बकाया है. 4 साल से दिवाली बोनस बकाया है. 2015 से अब तक के प्रोबेशन पीरियड के एरियर्स बकाया है. इसके अलावा, पांच साल के चिल्ड्रन अलाउंस के पैसे बकाया हैं. 
 
कुलदीप ने मांग की कि निगम आयुक्त को 26 जनवरी से पहले डीए/एचआरए लागू करने के आदेश देने होंगे और पेंडिंग सैलरी के साथ दिवाली बोनस देने होंगे. पेंडिंग एरियर्स को देने के लिए समय सीमा निर्धारित करनी होगी अन्यथा 26 को उत्तरी निगम शिक्षक गेट नम्बर तीन पर बैठकर अपनी आवाज अपनी मांगों को उठाएंगे. कंफेडरेशन ऑफ एमसीडी एंप्लायज यूनियन तीनों निगमों में काम करने वाले कर्मचारी और पेशनर्स को रिप्रजेंट करती हैं. कई पेंशनर्स कोरोनाकाल में पैसे के अभाव में ऑक्सीजन सिलिंडर तक नही ले पाए. दो महीने की सैलरी अभी तक नही मिली ऐसे में कोई दीवाली दशहरा या फिर दीवाली कैसे मनाएगा. कर्मचारियो का भी परिवार है. 
 
जीपीएफ घोटाले के आरोप 

नॉर्थ दिल्ली की खस्ताहालत पर निगम शासित बीजेपी को ही जिम्मेदार ठहराकर विपक्ष के नेता विकास गोयल ने कहा कि एक सवाल के जवाब में नॉर्थ दिल्ली नगर निगम ने कहा कि साल 2014 से अब तक कोई पैसा जीपीएफ अकाउंट में नही जा रहा है. जबकि ऐसा किया जाना अपराध है. स्टैंडिंग कमेटी में उनके पूछे गए सवाल के जवाब में पता लगा कि 1232.45 करोड़ जीएफ अकाउंट में पैसा होना चाहिए. जबकि जीपीएफ उकाउंट में मात्र 28 करोड़ रुपये पड़े हैं. ऐसे में 1200 करोड़ रुपए कहां गए इसका कोई जवाब नहीं मिला. रिटायर हो चुके ऐसे बहुत से कर्मचारी हैं, जिन्हे जीपीएफ का पैसा नही मिला.

 

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