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दिल्ली में 'कोरोना इन कंट्रोल' लेकिन डेंगू कैसे हुआ आउट ऑफ कंट्रोल?

कोरोना के खिलाफ लड़ाई चल ही रही है तो डेंगू नए रिकॉर्ड बना रहा है. अक्टूबर महीने में रिकॉर्ड 139 डेंगू के केस आए तो अफसरों के पसीने छूट गए. हफ्ते भर के अंदर ही 3 सालों में डेंगू के सबसे ज्यादा केस आ गए.

डेंगू-मलेरिया का दिल्ली में कोहराम डेंगू-मलेरिया का दिल्ली में कोहराम
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डेंगू-मलेरिया का दिल्ली में कोहराम
  • टूट रहे रिकॉर्ड, बढ़ रही चिंता

कोरोना के खिलाफ लड़ाई चल ही रही है तो डेंगू नए रिकॉर्ड बना रहा है. अक्टूबर महीने में रिकॉर्ड 139 डेंगू के केस आए तो अफसरों के पसीने छूट गए. हफ्ते भर के अंदर ही 3 सालों में डेंगू के सबसे ज्यादा केस आ गए. अब तक डेंगू के कुल 480 केस दिल्ली में दर्ज किए गए जो 3 सालों में सबसे ज्यादा हैं. इससे पहले 2020 में 316 और 2019 में 467 केस आए थे.

डेंगू-मलेरिया का कोहराम

अफसरों के पसीने छूटने की अलग वजह है, मॉनसून के जाने में देरी की वजह से ना तो ज्यादा ठंडी है और ना ही गर्मी, लिहाजा यह मौसम मच्छरों की ब्रीडिंग के लिए बहुत मुफीद है. शायद यही वजह है कि इस हफ्ते मलेरिया के 14 और चिकनगुनिया के 6 मामले  सामने आए. इस साल मलेरिया के कुल 127 केस दर्ज हैं जबकि पिछले साल मलेरिया के 189 और 2019 में 459 मामले आए थे.

पब्लिक हेल्थ ऑफिसर ने बताया कि लोगों को आगाह कर रहे हैं कि वह घरों में पानी इकट्ठा ना होने दें. नॉर्थ दिल्ली नगर निगम ने अपने बड़े अस्पताल हिंदू राव में 145 बेड डेंगू मरीजों के लिए रिजर्व किए हैं. ईस्ट दिल्ली नगर निगम ने अपने अस्पताल स्वामी दयानंद के 40 बेड रिजर्व कर दिए हैं.  ईस्ट एमसीडी ने बताया है कि डेंगू के 47, मलेरिया के 15 केस अब तक आए हैं.  हेल्थ  स्वामी दयानंद, वीर सावरकर, गुरु तेग बहादुर और छोटा बाजार सिविल अस्पताल में डेंगू जांच की सुविधा दी गई है.  

एलएनजेपी अस्पताल ने बनाया फीवर वार्ड

डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में अलग से डेंगू के लिए 3 वार्ड बनाए गए हैं. ना केवल 100 बिस्तर रिजर्व कर दिए गए हैं बल्कि अलग से फीवर वार्ड बनाया गया है. लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि डेंगू के 15 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं. इमरजेंसी के लिए प्लेटलेट्स की 200 यूनिट तैयार की गई हैं. अभी तक 5 मरीजों को ही प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ी है. यह मरीज मॉडरेट कैटेगरी के हैं. अभी तक ऐसे मरीज नहीं आए जिनको आईसीयू की जरूरत पड़े.

वैसे अब राजधानी में डेंगू जरूर चिंता बढ़ा रहा है, लेकिन कोरोना इन कंट्रोल दिखाई पड़ रहा है. डॉक्टर मान रहे हैं कि अगर समय रहते 18 से कम साल के बच्चों को भी टीका लगा दिया जाए, तो तीसरी लहर के खतरे को टाला जा सकता था. जोर सिर्फ तेज टीकाकरण पर देना है.

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