नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के खिलाफ 2019 में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ था. इस दौरान दिल्ली के जामिया इलाके में हिंसा हुई थी. इस हिंसा के आरोपी शरजील इमाम, सफूरा जरगर समेत अन्य आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली दिल्ली पुलिस की याचिका पर कल मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट फैसला सुनाएगा. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कल सुबह 10:30 बजे इन आरोपियों के मामले पर फैसला सुनाएंगी. पिछले सप्ताह दो घंटे से अधिक की विस्तृत सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया गया था.
बीते गुरुवार को दिल्ली पुलिस की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में अभियोजक दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि निचली अदालत ने जांच एजेंसी के खिलाफ टिप्पणियां पारित करके उसके क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किया है. निचली अदालत की टिप्पणी को फैसले से हटाया जाना चहिए.
आरोपियों को बेगुनाह बताने के फैसले का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कुछ वीडियो क्लिप चलाकर दिखाते हुए कहा था कि अगर इन वीडियो क्लिप के आधार पर निचली अदालत उन छात्रों को बेगुनाह कह रही है तो हम उसका विरोध करते हैं. दिल्ली पुलिस ने कहा कि तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में घायलों के बयान हैं. उन्होंने आरोपियों की पहचान की थी.
आरोपियों ने रखा अपना पक्ष
जबकि शरजील इमाम के वकील ने कहा कि कोई वीडियो या किसी गवाह का बयान मेरे खिलाफ नहीं है. मेरे खिलाफ चार्जशीट में एक शब्द भी नहीं है. शरजील इमाम के वकील ने कहा कि उसके खिलाफ ऐसा कोई बयान नहीं है, जो उस पर लगे आरोप साबित करता हो. सफूरा जरगर के वकील ने कहा कि जिस वीडियो क्लिप की बात दिल्ली पुलिस कर रही है, उसमें उनकी पहचान उजागर नहीं है. सफूरा का कहना है कि मेरी तो आज तक पहचान उजागर नहीं हुई है. क्योंकि क्लिप में उस शख्स ने चेहरा ढंका हुआ है. कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR के आधार पर भी मेरे ऊपर आरोप नहीं लगाया जा सकता है. घटना स्थल से 3-4 किलोमीटर दूर मेरा घर है.
सफूरा जरगर के वकील ने कहा कि 14 दिसंबर को की गई FIR में भी उनका नहीं था, चार्जशीट में भी उनका नाम शामिल नहीं है. चार्जशीट सिर्फ मोहम्मद इल्यास के खिलाफ दाखिल की गई थी. चार्जशीट में कहा गया कि मामले में दूसरे छात्रों के खिलाफ भी जांच की जा रही है, किसी पुलिस वाले ने सफूरा की पहचान तक नहीं की.
निचली अदालत ने 11 आरोपियों को किया रिहा
दूसरे आरोपियों की तरफ से वकील ने कहा कि मेन चार्जशीट में 23 लोगों के स्टेटमेंट दर्ज हैं, लेकिन किसी ने उनके बारे में कुछ नहीं कहा, दंगे हुए इसलिए पुलिस कह रही है कि वह दंगाई थे और वहां पर गैरकानूनी जमावड़ा था. लेकिन पुलिस यह नहीं कह रही कि इन आरोपियों की मौजूदगी में दंगा हुआ साकेत. कोर्ट ने शरजील ईमाम, शफूरा जरगर समेय कुल 11 आरोपियों को बरी किया था.
2019 में हुई थी हिंसा
गौरतलब है कि यह मामला जामिया मिलिया इस्लामिया में दिसंबर 2019 में हुई हिंसा से जुड़ा है. पुलिस ने इस दंगे के दौरान शरजील इमाम, सफूरा जरगर समेत 11 आरोपियों पर दंगा और गैरकानूनी प्रदर्शन की धाराएं लगाईं थीं.