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दिल्ली: खिलाड़ियों के लिए छत्रसाल स्टेडियम में बनेगा पांच मंजिला हॉस्टल: सिसोदिया

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि हॉस्टल बनने से खिलाड़ियों को लाभ होगा एवं वे स्टेडियम में रहते हुए ही अपने खेल व ट्रेनिंग पर ध्यान दे सकेंगे. उन्होंने कहा कि छत्रसाल स्टेडियम अब तक कुश्ती में देश को 5 ओलंपिक मेडल दे चुका है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • 20.92 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा हॉस्टल
  • खिलाड़ियों और कोच के लिए बनेंगे 64 कमरे
  • 16 महीनों में पूरा हो जाएगा निर्माण कार्य

दिल्ली में खेल को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों एवं उनके कोचों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए 20.92 करोड़ रूपये की लागत से छत्रसाल स्टेडियम में खिलाड़ियों और उनके कोचों के लिए पांच मंजिला हॉस्टल में 64 कमरे बनाए जाएंगे. हॉस्टल 2 मैट वाले रेसलिंग हॉल, मेडिकल रूम, फिजियोथेरेपी सेंटर, जिम, स्टीम बाथ के साथ-साथ अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. हॉस्टल का निर्माण कार्य  लगभग 16 महीनों में पूरा हो जाएगा. 

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि हॉस्टल बनने से खिलाड़ियों को लाभ होगा एवं वे स्टेडियम में रहते हुए ही अपने खेल व ट्रेनिंग पर ध्यान दे सकेंगे. उन्होंने कहा कि छत्रसाल स्टेडियम अब तक कुश्ती में देश को 5 ओलंपिक मेडल दे चुका है. इन आधुनिक सुविधाओं, हॉस्टल और कोचिंग के साथ स्टेडियम में आगे भी देश के लिए विश्वस्तरीय पहलवानों को तैयार किया जाएगा. 

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि मेडल जीत कर लाने वाले खिलाड़ियों को सभी सम्मानित करते हैं, करोड़ों के इनाम देते हैं. लेकिन जब खिलाड़ी मेडल लाने से पहले मैदान में ट्रेनिंग के दौरान पसीना बहाते हैं, स्ट्रगल कर रहे होते हैं, उस दौर में उनकी मदद दिल्ली सरकार करती है. उन्होंने साझा किया कि जिन खिलाडियों में आगे बढ़ने की सम्भावना होती है, उन्हें दिल्ली सरकार ‘प्ले एंड प्रोग्रेस’ और ‘मिशन एक्सीलेंस’ कार्यक्रम के तहत बेहतर ट्रेनिंग और कोच और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स के लिए आर्थिक मदद करती है. ताकि पैसों की कमी की वजह से उनके सपने न रुके.

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‘प्ले एंड प्रोग्रेस’ कार्यक्रम के तहत दिल्ली सरकार जूनियर लेवल पर खिलाड़ियों को 3 लाख रूपये तक की मदद करती है. वहीं ‘मिशन एक्सीलेंस’ कार्यक्रम के तहत 17 साल से बड़े खिलाड़ियों को उनके प्रशिक्षण के दौरान 16 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है. जिससे खिलाड़ियों को बेहतरीन ट्रेनिंग मिल सके.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे स्कूलों में खेलने को पढ़ना नहीं माना जाता है, जबकि खिलाड़ी का खेल ही उसकी असल पढ़ाई है. इसके लिए दिल्ली सरकार, दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी व दिल्ली स्पोर्ट्स स्कूल खोलने की तैयारी में है. इस यूनिवर्सिटी का उद्देश्य खिलाड़ियों को वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं देना है. इस यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले खिलाड़ियों के खेल को ही उनकी पढ़ाई मानी जाएगी. 

 

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