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अनिल चौधरी को दिल्ली कांग्रेस की कमान, उपाध्यक्ष चयन में वंशवाद हावी

कांग्रेस ने दिल्ली प्रदेश में अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने के लिए तेजी से फैसले लिए हैं. इसके तहत कांग्रेस ने दिल्ली प्रदेश की कमान अनिल चौधरी को सौंपी है तो वहीं पांच उपाध्यक्षों में वंशवाद हावी नजर आया है. कांग्रेस के दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के बेटे-बेटियों को उपाध्यक्ष बनाया गया है तो एक पूर्व विधायक के बेटे को भी उपाध्यक्ष नियुक्त किया है.

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राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ अनिल चौधरी
राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ अनिल चौधरी

  • दिल्ली कांग्रेस प्रदेश की कमान युवा चेहरे के हाथों में
  • 5 उपाध्यक्षों में से 3 नेताओं के बेटे-बेटियां

दिल्ली में कांग्रेस अपने जनाधार को वापस लाने की कवायद में जुटी है. इसके लिए युवा नेता अनिल चौधरी को कमान सौंपी है और साथ ही पांच उपाध्यक्ष बनाकर जातीय समीकरण को साधने की कवायद की है. हालांकि दिल्ली कांग्रेस की नई टीम में बनाए गए उपाध्यक्षों में वंशवाद हावी नजर आया है. कांग्रेस के दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के बेटे-बेटी तो एक पूर्व विधायक के बेटे को उपाध्यक्ष बनाया है.

दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गुर्जर समुदाय से आने वाले अनिल चौधरी को बनाया गया है. अनिल चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके हैं. शीला दीक्षित के सत्ता से हटने के बाद दिल्ली के गुर्जर समुदाय ने कांग्रेस से मुंह मोड़ लिया है और इन दिनों बीजेपी के पक्ष में एकजुट नजर आ रहा है. ऐसे में अनिल चौधरी पर काफी दारोमदार होगा कि वे पुराने वोट बैंक को वापस कांग्रेस के साथ जोड़ें.

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वहीं, उपाध्यक्ष के तौर पर शिवानी चोपड़ा, मुदित अग्रवाल, अली हसन, जयकिशन और अभिषेक दत्त के नाम पर मुहर लगी है. शिवानी चोपड़ा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा की बेटी हैं तो मुदित अग्रवाल पूर्व सांसद और प्रदेश अध्यक्ष रहे जेपी अग्रवाल के बेटे हैं. इसके अलावा अली हसन पूर्व विधायक अहमद हसन के बेटे हैं. इसके अलावा अभिषेक दत्त और जयकिशन को भी पार्टी ने दिल्ली प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया है.

कांग्रेस ने दिल्ली प्रदेश कमेटी में उपाध्यक्षों के जरिए जातीय संतुलन बनाने की कोशिश की है, लेकिन जाट समुदाय को जगह नहीं मिल सकी है. इसके तहत पंजाबी और महिला के नाम पर शिवानी चोपड़ा के नाम पर, पंजाबी-पंडित के नाम पर अभिषेक दत्त, दलित के नाम पर जयकिशन, वैश्य के नाम पर मुदित अग्रवाल, मुस्लिम के नाम पर अली हसन को मौका दिया है.

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दिलचस्प इन पांचों उपाध्यक्षों को कांग्रेस ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव का टिकट दिया था, जिनमें एक भी जीतना तो दूर की बात अपनी जमानत भी नहीं बचा सका. जयकिशन भी चार बार के विधायक रह चुके हैं, जिन्होंने कुछ बेहतर चुनाव लड़े थे, लेकिन बाकी नेताओं को करारी हार का मुंह देखना पड़ा है. ऐसे में यह सवाल यह उठ रहा है कि विधानभा में शिकस्त खाए नेताओं पर दांव लगाकर कांग्रेस ने कोई बड़ी गलती तो नहीं कर दी है.

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