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बस मार्शलों की बहाली को लेकर दिल्ली में घमासान, BJP ने प्रदर्शन कर लगाया CM आतिशी को घेरा

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस की गाड़ियों में भरकर ले जाया गया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया."

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दिल्ली बीजेपी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन
दिल्ली बीजेपी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में बस मार्शलों की बहाली को लेकर घमासान छिड़ा हुआ है. आज बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत पार्टी कार्यकर्ताओं ने सीएम आतिशी के आवास का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. बीजेपी 10,000 सिविल डिफेंस कार्यकर्ताओं की बहाली की मांग कर रही है.  बीजेपी कार्यकर्ताओं के अलावा पुलिस प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को भी डिटेन कर अपने साथ ले गई.

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस की गाड़ियों में भरकर ले जाया गया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया."

प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे सचदेवा ने आतिशी पर बस मार्शलों की फिर से नियुक्ति के लिए कुछ भी नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम बस मार्शलों बहाली के लिए कुछ करने में नाकामयाब साबित हुई हैं और इसके लिए मुख्यमंत्री को जवाब देना पड़ेगा कि जबकि एलजी वीके सक्सेना ने इसे 1 नवंबर तक लागू करने का निर्देश दिया था. 

यह भी पढ़ें: बर्खास्त बस मार्शल की तैनाती का मामला, आप और भाजपा दोनों ने किया जीत का दावा

एलजी के पास नहीं आया प्रस्ताव

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आतिशी ने रविवार को कहा था कि शहर में वायु प्रदूषण विरोधी उपायों को लागू करने वाली विभिन्न एजेंसियों के साथ सिविल डिफेंस वॉलियंटर (सीडीवी) की तैनाती अगले दो-चार दिनों में शुरू हो जाएगी. उन्होंने यह भी कहा था कि हटाए गए सीडीवी की स्थायी नियुक्ति का प्रस्ताव अगले एक सप्ताह में एलजी की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. एलजी ने पहले आतिशी को पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें सीडीवी की फिर से नियुक्ति के लिए उनकी सरकार से अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं मिला है. उन्होंने मुख्यमंत्री से इस प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया.

सार्वजनिक परिवहन बसों में मार्शल के रूप में काम कर रहे 10,000 सिविल डिफेंस वॉलियंटर को पिछले साल नवंबर में नौकरी से हटा दिया गया था, क्योंकि आपत्ति जताई गई थी कि उन्हें आपदा न्यूनीकरण कार्यों के लिए तैनात किया गया था.

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