scorecardresearch
 

दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र पर बोले विजेंद्र गुप्ता- बताया निरर्थक सत्र

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने केजरीवाल सरकार पर लोकतंत्र की आवाज दबाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने अपनी सारी शक्ति विपक्ष की आवाज को दबाने में गवां दी.

X
विजेंद्र गुप्ता, फोटो- मणिदीप शर्मा विजेंद्र गुप्ता, फोटो- मणिदीप शर्मा

दिल्ली विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुक्रवार तक चला. मगर विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विधानसभा का यह सत्र अब तक का सबसे निरर्थक और असफल रहा. उन्होंने कहा कि अनेक कानून अभी भी लटके पड़े हैं, मगर आम आदमी पार्टी सरकार इस सत्र में एक भी विधेयक नहीं ला सकी.

बीजेपी नेता ने कहा कि सरकार ने कैबिनेट निर्णयों पर आधारित जो भी मुद्दे सदन में रखे अथवा जो भी सूचनाएं सदन में दी, उनके लिए सदन बुलाए जाने की आवश्यकता ही नहीं थी. सीसीटीवी कैमरे लगाने, एमएलए लैड फंड बढ़ाने, पेंशन सम्बन्धी जानकारी देने जैसे विषयों की जानकारी सरकार बिना सदन बुलाए सीधे तौर पर जनता को दे सकती थी.

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सरकार ने अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिए जनता की कमाई से अर्जित करोड़ों रुपये के राजस्व को व्यर्थ गवां दिया. वास्तव में सरकार ने जनहित के किसी भी मुद्दे पर कोई सार्थक प्रयास ही नहीं किया. उन्होंने कहा कि मंत्रियों और विधायकों ने सन्दर्भ से बाहर जाकर गैरजिम्मेदाराना और अर्थहीन बयान दिये. सत्र को लेकर सरकार की गम्भीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांच दिन चले सदन में मुख्यमंत्री ने केवल 15-20 मिनट से अधिक बैठना गवांरा नहीं समझा.

केजरीवाल सरकार पर लोकतंत्र की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए बीजेपी नेता ने कहा कि सरकार ने अपनी सारी शक्ति विपक्ष की आवाज को दबाने में गवां दी. उसकी रणनीति यही रही कि विपक्ष को सदन में जनहित का अथवा उसकी अनियमिताओं और भ्रष्ट आचरण का कोई भी मुद्दा नहीं उठाने दिया जाए.

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह दिल्लीवासियों का दुर्भाग्य है कि विपक्ष ने जब भी सदन में बंग्लादेशी घुसपैठियों, महिला अधिकारी की प्रताड़ना जैसे जनहित के मुद्दे उठाए आम आदमी पार्टी ने उसकी आवाज को बल पूर्वक दबा दिया.

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को भी जैसे ही उन्होंने मंडावली में बच्चियों की भूख से मौत और मुख्यमंत्री के 1.85 लाख के खाने के बिल तथा उनके विधानसभा क्षेत्र में बच्ची के साथ बलत्कार की आवाज उठाई उन्हें बार-बार बाहर निकाले जाने की धमकी दी गई. चार दिन चले सदन में उन्हें तीन बार मार्शलों द्वारा जबरदस्ती सदन से बाहर निकाला गया, ताकि वे सत्तापक्ष पर भारी पड़ रहे मुद्दों को न उठा पाएं.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें