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दिल्ली आग: 1 महीने पहले बिहार से आया था भाई, कोई खबर नहीं- परिजन

चश्मदीद के मुताबिक़ 150 के क़रीब लोग यहीं रह रहे थे. उनका काम, खाना-पीना और सोना सब कुछ यहीं होता था. उनके परिवारवाले गांव में रहते थे. तीन मंज़िल के इस इमारत में सिलाई और पैकिंग का काम होता था.

दिल्ली अनाज मंडी में आग (फोटो- आईएएनएस) दिल्ली अनाज मंडी में आग (फोटो- आईएएनएस)

  • घटना में मरने वाले ज़्यादातर लोग मजदूर
  • फैक्ट्री में सुबह करीब 5 बजे के लगी आग

दिल्ली में रविवार सुबह ज़्यादातर लोग रज़ाई में दुबक कर सो रहे थे. उसी वक़्त रानी झांसी रोड पर कुछ लोग ऐसे भी थे जो सोते-सोते मौत के आगोश में समा गए. दिल्ली के रानी झांसी रोड पर अनाज मंडी स्थित फैक्ट्री के लोग जब शनिवार रात खा-पीकर सोने गए थे तो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि वो रविवार की सुबह देख ही नहीं पाएंगे.

सुबह 5 बजे के क़रीब अनाज मंडी स्थित एक फैक्ट्री में आग लगी. संकरी और तंग गलियों के बीच किसी तरह राहत और बचाव का काम शुरू हुआ. देखते ही देखते मरने वाले लोगों का आंकड़ा 43 पर पहुंच गया. बिहार और यूपी से आए कई मज़दूर इस फैक्ट्री में काम करते थे और रात में यहीं सोते भी थे.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि लोग फैक्ट्री में देर रात काम करने के बाद सो रहे थे. घटना के बाद इलाक़े में हड़कंप मच गया. लोग इधर उधर भागने लगे. आग इतनी भयानक थी कि क़ाबू पाने के लिए दमकल की 30 गाड़ियां मैके पर पहुंची. हालांकि देखते ही देखते आग बढ़ती चली गई. घटना के बाद घायल लोगों को पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया.

चश्मदीद के मुताबिक़ 150 के क़रीब लोग यहीं रह रहे थे. उनका काम, खाना-पीना और सोना सब कुछ यहीं होता था. उनके परिवारवाले गांव में ही रहते थे. तीन मंज़िल के इस इमारत में सिलाई और पैकिंग का काम होता था.

आग पहले कहां लगी यह स्पष्ट नहीं है लेकिन यह तेज़ी से फैलने लगी. बाद में धुआं इतना बढ़ा कि ऊपर के मंज़िलों में सो रहे लोगों का दम भी घुटने लगा. रविवार की यह घटना 1997 के दिल्ली उपहार कांड से भी ज़्यादा ख़तरनाक लग रही है. जिसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.

सुबह 9 बजे तक यह ख़बर आग की तरह फैल गई. जिसके बाद इस इलाक़े में काम करने वाले मज़दूर और मालिकों के परिजन उनकी खोजबीन के लिए झांसी रोड पहुंचे. तीन मंजिला इमारत नें फंसे अताबुल के भाई उन्हें ढूंढने LNJP (लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल) अस्पताल पहुंचे. वे बिहार के रहने वाले हैं.

आजतक से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने भाई को ढूंढ रहे हैं लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही है और न ही अंदर जाने दे रहे हैं. एक महीने पहले ही वो दिल्ली काम करने आया था. 

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि मेरा तीन भतीजा यहीं पर अपनी फैक्ट्री चलाता था. उसके साथ 15 अन्य लोग भी काम कर रहे थे. सबका काम बैग सिलाई और पैकिंग का था. समझ नहीं आ रहा मैं उसे कहां ढूंढ़ू.

 कैसे लगी आग, कितनों की हुई मौत?

बता दें कि दिल्ली के रानी झांसी रोड बाजार में रविवार को आग लगने से कम से कम 43 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं. यह जानकारी राष्ट्रीय राजधानी के अग्निशमन विभाग ने दी है.

घटना में मरने वाले ज़्यादातर लोग मजदूर हैं, जो कारखाने में रविवार सुबह 4.30-5.00 बजे के आस पास लगी आग के दौरान सो रहे थे. घटना के बाद अब तक 60 से अधिक लोगों को वहां से निकाला जा चुका है और उन्हें लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल और लेडी हॉर्डिग हॉस्पिटल में ले जाया गया है.

एलएनजेपी अस्पताल में 34 और लेडी हार्डिंग अस्पताल में नौ लोगों के मरने की सूचना मिली है. अग्निशमन विभाग ने बताया कि बाजार में आग लगने की सूचना उन्हें सुबह करीब 5.22 पर मिली, जिसके बाद 30 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं. आग लगने की सही वजह का पता नहीं चल पाया है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लग सकता है.

दिल्ली अग्निशमन विभाग के प्रमुख अतुल गर्ग ने कहा कि आग लगने से करीब 40 लोगों की मौत हो गई, आग एक बैग बनाने वाले कारखाने में लगी है, वहीं आग आसपास की दो अन्य इमारतों में फैल गई है. मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है. वहीं पुलिस ने बताया कि कारखाने के मालिक के खिलाफ आवासीय क्षेत्र से बैग बनाने के कारखाने के संचालन और सुरक्षा मापदंडों का पालन न करने को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है.

क्या है उपहार अग्निकांड?

ऐसा कहा जा रहा है कि यह अग्निकांड, दिल्ली में आग लगने की बड़ी घटनाओं में से एक है. इससे पहले 13 जून, 1997 को दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में स्थित उपहार सिनेमा में ऐसी ही घटना घटी थी, जिसमें 59 लोगों की जान चली गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे.

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