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मुंबई का धारावी की तरह अब दिल्ली के स्लम इलाकों में भी पैर पसारने लगा कोरोना?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते देख सरकार अब कोरोना मरीजों को घर पर ही होम क्वारनटीन कर रही है. सरकार का यह फैसला उन घरों के लिए तो ठीक है, जिन घरों में दो या तीन कमरे हैं, लेकिन दिल्ली की कई झुग्गी बस्तियां ऐसी हैं, जहां 8 बाई 8 के कमरे हैं. ऐसे में भला इन कमरों में किसी को होम क्वारनटीन करना कैसे संभव है?

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दिल्ली की झुग्गी बस्ती
दिल्ली की झुग्गी बस्ती

  • 8 बाई 8 के कमरे में लोगों को होम क्वारनटीन करना हो रहा मुश्किल
  • कंटेनमेंट स्लम बस्तियों में बिना मास्क लगाए खुलेआम घूम रहे हैं लोग

दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. मुंबई की धारावी की तरह दिल्ली के स्लम इलाकों में भी कोरोना वायरस तेजी से पैर पसार रहा है. दिल्ली की इन स्लम बस्तियों में होम क्वारनटीन करने की शिकायत भी लोग कर रहे हैं. इन स्लम इलाकों में यह भी दिक्कत है कि यहां घर बहुत छोटे और आबादी घनी है. ऐसे में सवाल यह है कि इन इलाकों में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 2 गज की दूरी बनाने का पालन कैसे होगा?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते देख सरकार अब कोरोना मरीजों को घर पर ही होम क्वारनटीन कर रही है. सरकार का यह फैसला उन घरों के लिए तो ठीक है, जिन घरों में दो या तीन कमरे हैं, लेकिन दिल्ली की कई झुग्गी बस्तियां ऐसी हैं, जहां 8 बाई 8 के कमरे हैं. ऐसे में भला इन कमरों में किसी को होम क्वारनटीन करना कैसे संभव है?

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पूर्वी दिल्ली की सफेदा झुग्गी बस्ती की आबादी लगभग 10 हजार के आसपास है. पिछले कई दिनों से यह बस्ती कंटेंनमेंट जोन में है. यहां कोरोना वायरस के कई मामले सामने आए हैं, जिसके बाद इस बस्ती को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है, लेकिन कंटेनमेंट जोन होने के बावजूद पूरी बस्ती में लोग खुलेआम बिना मास्क लगाए घूम रहे हैं और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे हैं.

झुग्गी बस्ती में कोरोना मरीज के साथ रह रहे परिजन

इन स्लम इलाकों की तंग गलियों में 8 बाई 8 के कमरे में मरीज और उसके परिवार वाले एक साथ रह रहे हैं. इस बस्ती में रहने वाले अंशु को कुछ दिन पहले कोरोना हो गया था, जिसके चलते उनको होम क्वारनटीन किया गया था. इस दौरान अंशु की मां भी उसके साथ रहती हैं. आस-पड़ोस के लोगों की माने तो जब से इस इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है, तब से इस इलाके में न तो कोई डॉक्टर आया और न ही सरकारी अधिकारी.

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आलम यह है कि इतनी बड़ी बस्ती में कॉमन टॉयलेट ही लोग इस्तेमाल करते हैं. कुछ ऐसा ही नजारा साउथ दिल्ली के सुधार कैंप में भी देखने को मिला. इस कैंप की भी लगभग 7 हजार की आबादी है. यहां रहने वाले लोगों का आरोप है कि पिछले दिनों इस बस्ती में भी एक व्यक्ति को कोरोना हुआ था, जिसके बाद उसको भी सरकार ने बस्ती में होम क्वारनटीन किया था. इसका बस्ती के कुछ लोगों ने विरोध भी किया था. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद उस मरीज को बदरपुर के एक हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया था.

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कोठी-बंगलों में रहने वालों का हो रहा कोरोना टेस्ट, तो हमारा क्यों नहीं?

बस्ती के लोगों का कहना है कि कोरोना की दहशत इस कदर है कि वो जिन कोठियों में काम करते थे, उन कोठियों में रहने वाले कई लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं. ऐसे में सरकार को इस बस्ती में रहने वाले लोगों की भी कोरोना जांच करानी चाहिए. जब कोठी और बंगलों में रहने वाले लोगों का कोरोना टेस्ट आसानी से हो जाता है, तो हमारा कोरोना टेस्ट क्यों नहीं कराया जा रहा है? सरकारी आंकड़ों की माने तो दिल्ली में लगभग 750 झुग्गी-झोपड़ियां हैं, जिनमें लगभग 15 से 20 लाख की आबादी रहती है.

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