कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसे देखते हुये सरकार ने लॉकडाउन की मियाद 3 मई तक बढ़ा दी, जो 14 अप्रैल को ही समाप्त हो रही थी. 21 दिन के बाद लॉकडाउन को और आगे बढ़ाए जाने से बहुत से परिवारों के सामने भोजन का संकट पैदा हो गया है. सरकारें दावे तो बहुत कर रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है.
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हालत यह है कि कार्ड धारकों को मैसेज तो मिल गया, लेकिन जब वे राशन लेने पहुंच रहे हैं तो राशन मिल नहीं रहा है. सरकारी राशन की दुकानों पर कार्ड धारकों को यह कह कर लौटा दिया जा रहा है कि सरकार की ओर से अभी राशन नहीं आया है. दिल्ली राशन संघ के अध्यक्ष शिव कुमार का कहना है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों के लिए 5 किलो राशन आना था.
उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 17 अप्रैल को दिल्ली सरकार को आदेश भी जारी कर दिया गया था. राशन संघ अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली सरकार ने भी इस संबंध में आदेश जारी कर दिया, लेकिन दुकानों तक राशन पहुंचा ही नहीं. शिव कुमार ने कहा कि दुकानों पर राशन पहुंचा नहीं और कार्ड धारकों को मैसेज भी भेज दिए गए.
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उन्होंने कहा कि इससे राशन दुकान के संचालकों और कार्ड धारकों के बीच रोज तू-तू-मैं-मैं हो रही है. दुकान संचालकों के कमीशन का भुगतान भी चार माह से लंबित होने का दावा करते हुए शिव कुमार ने कहा कि वे इस विपरीत हालात में भी अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही.