क्रिसमस के मौके पर देशभर में लोग अलग-अलग तरीके से इसे सेलिब्रेट कर रहे हैं. इस मौके पर ओडिशा के सुदर्शन पटनायक ने पुरी में समुद्र के किनारे गुलाब के फूलों से सांता क्लॉस की कलाकृति बना दी. उन्होंने इसे बनाने के लिए करीब 5,400 गुलाबों का इस्तेमाल किया. उनके इस कलाकृति को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. सुदर्शन ने अपनी कलाकृति के साथ लोगों को क्रिसमस की शुभकामनाएं दी. साथ ही कोरोना के नियमों के साथ क्रिसमस सेलिब्रेट करने का संदेश दिया.
आजतक से बातचीत में सुदर्शन ने कहा कि क्रिसमस के अवसर पर मैंने करीब 5,400 लाल गुलाब और कुछ सफेद फूलों का इस्तेमाल कर सांता क्लॉज की 50 फीट लंबी और 28 फीट चौड़ी रेत की कलाकृति बनाई है. इस कलाकृति को पूरा करने के लिए मैंने अपने रेत कला संस्थान की मदद से 8 घंटों तक नक्काशी की. इसके बाद फूलों से सांता क्लॉस तैयार करने में दो दिन का समय लगा.
वहीं, लोकप्रिय मिनिएचर कलाकार एल ईश्वर राव ने एक कांच की बोतल के अंदर पत्थरों के टुकड़ों को जोड़-जोड़ कर बेहतरीन सांता क्लॉस बनाया है. राव ने 750 मिलीलीटर की दूसरी कांच की बोतल में एक इको-फ्रेंडली क्रिसमस ट्री को तैयार किया है. कांच की बोतलों के अंदर बना सांता क्लॉस और क्रिसमस ट्री लोगों को काफी पसंद आया है.
आजतक से बातचीत में राव ने कहा कि ओडिशा सरकार ने कोविड के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मद्देनजर नया गाइडलाइन जारी किया है. मैं एक मिनिएचर कलाकार हूं और अपनी कला के माध्यम से लोगों को क्रिसमस की बधाई देता हूं. साथ ही मैं भी सभी से कोरोना के नियमों का पालन करते हुए क्रिसमस सेलिब्रेट करने का अनुरोध करता हूं.
राव ने कहा कि कांच की बोतल में बनाए गए सांता क्लॉज की लंबाई 4 इंच और चौड़ाई 2 इंच है. बोतल में छोटे-छोटे 9 पत्थर के टुकड़ों को जोड़कर सांता क्लॉस को तैयार किया गया है और इसे पूरा करने में दो दिनों का समय लगा है. वहीं, कांच की बोतल के अंदर क्रिसमस ट्री को मिट्टी और रूई की मदद से तैयार किया गया है. बोतल में इको-फ्रेंडली क्रिसमस ट्री 8 इंच लंबा और 2 इंच चौड़ा है. इसे तैयार करने के लिए 7 दिनों का समय लगा है.