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BJP का आरोप- दिल्ली में 131 लोगों के पास 15-15 राशन कार्ड

भारतीय जनता पार्टी लगातार केजरीवाल सरकार पर निशाना साध रही है. बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल सरकार ने जानबूझकर करीब 2 लाख नकली राशन कार्ड को कैसिंल नहीं किया है. जबकि इनके खिलाफ काफी शिकायतें लगातार आ रही थी.

दिल्ली बीजेपी प्रमुख मनोज तिवारी (File Pic) दिल्ली बीजेपी प्रमुख मनोज तिवारी (File Pic)

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर घोटाले का जिन्न निकला है, जिससे राजनीतिक भूचाल आ गया है. CAG रिपोर्ट में दिल्ली के राशन सिस्टम पर सवाल उठने के बाद अब केजरीवाल सरकार पर विरोधियों ने निशाना साधा है.

भारतीय जनता पार्टी लगातार केजरीवाल सरकार पर निशाना साध रही है. बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल सरकार ने जानबूझकर करीब 2 लाख नकली राशन कार्ड को कैसिंल नहीं किया है. जबकि इनके खिलाफ काफी शिकायतें लगातार आ रही थी.

मेल टुडे की खबर के अनुसार, बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने आरोप लगाया है कि करीब 4 लाख राशन कार्ड दिल्ली में फर्जी हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली में मंजू नाम की एक महिला के नाम से करीब 115 राशन कार्ड हैं, जबकि लक्ष्मी नामक महिला के नाम पर 68 राशन कार्ड मौजूद हैं. लेखी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में करीब ऐसे 131 लोग हैं, जिनके नाम पर 15 से 20 राशन कार्ड मौजूद हैं.

वहीं दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि आम आदमी पार्टी को इस बारे में पूरी जानकारी थी. बजट में डोर टू डोर डिलीवरी की बात करना सिर्फ स्कैम को छुपाने का एक तरीका था. उन्होंने आरोप लगाया कि ये 5400 करोड़ रुपए का घोटाला केजरीवाल सरकार के 3 साल के कार्यकाल में हुआ है.

उन्होंने कहा कि जैसे ही दिल्ली में फर्जी राशन कार्ड को कैंसिल किया जाना शुरू हुआ, वैसे ही केजरीवाल सरकार ने इस पर हंगामा मचाना शुरू कर दिया. बता दें कि रिपोर्ट से FCI के गोदामों से राशन की दुकानों तक अनाज पहुंचाने के लिए स्कूटर, बस, ऑटो और बाइक तक का इस्तेमाल करने की बात भी सामने आई है.

CAG ने राशन वितरण प्रणाली में क्या खामियां पाई?

- आमतौर पर राशन कार्ड घर की महिला सदस्यों के नाम पर बनाया जाता है, लेकिन 13 मामलों में घर की सबसे बड़ी सदस्य की उम्र 18 साल से कम पाई गई. 12 हजार 852 मामलों में तो घरों में एक भी महिला सदस्य नहीं पाई गई.

- राशन का सामान ढोने वाली 207 गाड़ियों में से 42 गाड़ियां ऐसी थीं, जिनका रजिस्ट्रेशन परिवहन विभाग के पास था ही नहीं.

- आठ गाड़ियां ऐसी थीं, जिन्होंने 1500 क्विंटल से ज्यादा राशन ढुलाई की, लेकिन उनके रजिस्ट्रेशन नंबर बस, टू व्हीलर या थ्री व्हीलर के पाए गए.

- सभी राशन कार्ड धारकों को एसएमएस पर अलर्ट आने थे, लेकिन 2,453 मामलों में नंबर राशन दुकानदारों के ही निकले.

- राशन से जुड़ी समस्याओं को लेकर जो कॉल सेंटर बनाया गया, उनमें साल 2013 से साल 2017 के बीच आए तकरीबन 16 लाख कॉल में सिर्फ 42 फीसदी कॉल का जवाब दिया गया.

- सभी अधिकारियों को फील्ड इंस्पेक्शन करना था, लेकिन ऑडिट में ऐसे इंस्पेक्शन नहीं पाए गए.

- 412 राशन कार्ड ऐसे पाए गए, जिनमें परिवार के एक सदस्य का नाम ही कई बार लिखा गया था.

- राशन सिर्फ उन परिवारों को दिया जाता है, जो गरीब हैं, लेकिन एक हजार से ज्यादा कार्ड में नौकरों का नाम भी शामिल था यानी ऐसे उपभोक्ता भी हैं, जो नौकर रख सकते हैं. ऐसे लोग इनकम टैक्स भी नहीं देते हैं और न ही इनके पास दो किलोवाट से ज्यादा का बिजली कनेक्शन है.

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