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दिल्ली में लगाना चाहते हैं दुर्गा पूजा का पंडाल, तो जान लीजिए नियम, इन विभागों से लेनी होगी मंजूरी

अगले हफ्ते से नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है. इस मौके पर कई किस्म के आयोजन किए जाते हैं. दिल्ली में रामलीलाओं का बड़े पैमाने पर आयोजन होता है. लेकिन इसके साथ नवरात्र मेले और दुर्गा पूजाओं का क्रेज भी रहता है. देश की राजधानी में हर राज्य के लोग रहते हैं जो अलग-अलग तरीकों से नवरात्रों का आयोजन करते हैं.

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(सांकेतिक तस्वीर - PTI)
(सांकेतिक तस्वीर - PTI)

अगले हफ्ते से नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है. इस मौके पर कई किस्म के आयोजन किए जाते हैं. दिल्ली में रामलीलाओं का बड़े पैमाने पर आयोजन होता है. लेकिन इसके साथ नवरात्र मेले और दुर्गा पूजाओं का क्रेज भी रहता है. देश की राजधानी में हर राज्य के लोग रहते हैं जो अलग-अलग तरीकों से नवरात्रों का आयोजन करते हैं. बंगाल, ओडीसा, झारखंड और बिहार के निवासी बहुल क्षेत्रों में दुर्गा पूजा का आयोजनों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन इनके लिए आयोजकों को कई सारे परमिशन भी लेने पड़े हैं. जानिए, कौन-कौन से विभागों से कैसी-कैसी मंजूरी दुर्गा पूजा के सार्वजनिक आयोजन के लिए जरूरी होगी.

लैंड ओनिंग एजेंसी से जमीन के इस्तेमाल की मंजूरी

अगर आयोजकों ने ये तय किया है कि उन्हें किस इलाके में पूजा आयोजित करनी है तो फिर उन्हें आयोजन के लिए एक ऐसी खाली जगह भी चाहिए होगी जहां मूर्ति स्थापित की जा सके. इसके लिए जिस विभाग की वो जमीन है उससे मंजूरी आवश्यक है. मसलन, डीडीए, डीएसआईआईडीसी, रेलवे, पीडब्ल्यूडी जैसी एजेंसियों से उनकी जमीन के इस्तेमाल के लिए मंजूरी चाहिए होगी. अगर किसी प्राइवेट लैंड में आयोजन हो रहा है तो उसके मालिक से भी लिखित रजामंदी जरूरी है. इसके लिए पार्क या प्लॉट की बुकिंग जहां-जहां होनी है वो तय तारीखों के हिसाब से जरूरी रकम चुका कर करनी होगी और एजेंसी लिखित तौर पर बुकिंग की कंफर्मेशन देगा.

कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस की मंजूरी

त्योहारों के समय कानून व्यवस्था सुनियोजित तरीके से चले इसकी जिम्मेदारी पुलिस की होती है. इसके लिए पुलिस को कार्यक्रम की पूरी डिटेल के साथ एक आवेदन देना होगा. इस आवेदन के साथ पूजा आयोजित करने के लिए जो जमीन की बुकिंग करवाई गई है उसकी मंजूरी वाली चिट्ठी भी लगानी ज़रूरी होगी. पुलिस को ये भी बताना होगा कि आयोजन के दौरान कितने लोगों के आने का अनुमान है, ताकि प्रशासन उसके हिसाब से पुलिसकर्मियों को लगा सके.

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फायर सेफ्टी के लिए नो ऑब्जेक्शन

जब कोई बड़े आयोजन होते हैं तो आग से सुरक्षा का ख्याल रखना होता है. लेकिन पुलिस के जानकार बताते हैं कि खास तौर पर ऐसी मंजूरी तब जरूरी होती है जब जिस स्थान पर ऐसा आयोजन हो रहा है वो बंद हो और वहां आग लगने की आशंका पर लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए आग बुझाने के लिए जरूरी उपक्रमों को रखना आवश्यक हो. आम तौर पर खुले मैदान में होने वाले आयोजनों में जहां आग से नुकसान की आशंका कम हो वहां पर फायर डिपार्टमेंट को पुलिस द्वारा ही जानकारी दी जाती है ताकि वो किसी दुर्घटना की हालत में तैयार रहें.

ट्रैफिक पुलिस का भी रोल 

जब भी कोई बड़ा आयोजन होता है तो ट्रैफिक की समस्या उस इलाके में होती है. खास तौर पर तब जबकि आयोजन स्थल मेन रोड पर हो जहां आम तौर पर ट्रैफिक रुकने से अव्यवस्था बढ़ सकती है. ऐसी सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की मंजूरी भी आवश्यक होती है ताकि पार्किंग से लेकर ट्रैफिक को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित हो और आम लोगों को परेशानी नहीं आए.

बिजली की व्यवस्था के लिए डिस्कॉम से लोड की मंजूरी

दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों के लिए बिजली की जरूरत काफी महत्वपूर्ण है. लाइटिंग से लेकर बाकी उपकरणों को चलाने के लिए बिजली सप्लाई काफी अहम होती है ऐसे में बिना रोक-टोक के बिजली सप्लाई चलती रहे इसकी व्यवस्था डिस्कॉम कंपनियां करतीं हैं. ये मंजूरी इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि दिल्ली में प्रदूषण के मद्देनज़र डीज़ल जेनरेटर सेट पर प्रतिबंध भी लगा हुआ है.

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यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में नहीं कम हो रहीं हिंदुओं की मुश्किलें, अब दुर्गा पूजा मनाने पर कट्टरपंथी संगठनों ने दी चेतावनी

साउंड के नियमों के पालन के लिए पुलिस की मंजूरी

पूजा पंडालों में आयोजन के समय साउंड और म्यूजिक सिस्टम भी लगाए जाते हैं. ऐसे में ये आयोजकों की जिम्मेदारी होती है कि वो तय मानकों के हिसाब से ही इन सिस्टम का उपयोग करें ताकि आस-पास के रिहाएशी इलाकों में आम लोगों को कोई परेशानी ना आए. खास तौर पर जिन इलाकों में अस्पताल और स्कूल नज़दीक हैं वहां आयोजकों को सहमति देनी होती है कि वो आवाज़ के स्तर को मेंटेन करेंगे.

एमसीडी जैसे स्थानीय निकायों की परमिशन

अगर पूजा के आयोजन के साथ मेले का भी आयोजन हो रहा है जहां खाने-पीने की चीजों की खरीद बिक्री हो रही है ऐसी हालत में साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी. बारिश की हालत में पानी जमा होने पर ऐसी जगहों पर मच्छर पैदा ना हों इसके लिए भी एमसीडी, एनडीएमसी को लगातार छिड़काव करना होता है.

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